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चाइनीज ड्रोन को पाक ने बनाया आसमानी आतंक का औजार, भारत कितना तैयार?

खुफिया जानकारी थी कि पाकिस्तान ने चीन से बड़ी संख्या में ड्रोन्स खरीदे हैं और ये भी जानकारी थी कि पाकिस्तान ने ये ड्रोन पिज्जा डिलिवरी या दवाइयों की डिलिवरी के लिए नहीं खरीदे थे.

ड्रोन हमले से आतंकियों को कोई नुकसान भी नहीं है. (फोटो-PTI/प्रतीकात्मक तस्वीर) ड्रोन हमले से आतंकियों को कोई नुकसान भी नहीं है. (फोटो-PTI/प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पाकिस्तान ने चीन से खरीदे थे ड्रोन
  • भारत को इसका जवाब देना होगा

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले के पीछे कौन था? 48 घंटे बीत जाने के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं मिला है. इस आतंकी हमले की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है. अब तक ये बात साफ हो चुकी है कि हमला ड्रोन के जरिए ही हुआ था, लेकिन अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मिलिट्री ग्रेड एक्सप्लोसिव किसी देश की सेना के ही पास होते हैं.

पिज्जा डिलिवरी के लिए नहीं खरीदे थे ड्रोन!
खुफिया जानकारी थी कि पाकिस्तान ने चीन से बड़ी संख्या में ड्रोन्स खरीद हैं और ये भी जानकारी थी कि पाकिस्तान ने ये ड्रोन पिज्जा डिलिवरी या दवाइयों की डिलिवरी के लिए नहीं खरीदे थे. लेकिन इतनी जल्दी इन ड्रोन्स का इस्तेमाल इस काम में होगा, ये जांच की बात है. 

इसके बाद अब कहा जा रहा है कि भारत अपने सैन्य ठिकानों को या सेना के जो काफिले जाते हैं, उनको कैसे बचाएगा. जब पुलवामा हमला हुआ था तो उसमें आतंकी ने विस्फोटक से भरी अपनी कार सीआरपीएफ के काफिले से टकरा दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे. लेकिन अब आतंकियों को ऐसा करने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि जम्मू-कश्मीर के हाइवे पर कई ऐसी पहाड़ियां हैं, जिनपर आतंकी बैठ सकते हैं और उन पहाड़ियों के ऊपर से ड्रोन के जरिए विस्फोटक को सेना की किसी गाड़ी पर गिरा सकते हैं और अगर वो ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे तो उन्हें तो कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन सेना को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है.

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भारत के पास क्या हैं विकल्प?
अभी सेना या वायुसेना के पास जो रडार है, वो बड़े लड़ाकू विमानों की टोह लेने के लिए है. ड्रोन कई प्रकार के होते हैं. इनमें छोटे ड्रोन जैसे क्वाडकॉप्टर, हेक्साकॉप्टर भी होते हैं. एक मिलिट्री ग्रेड ड्रोन भी होते हैं, जो अपने साथ बम-हथियार ले जा सकते हैं. इसके साथ-साथ अब दुश्मन एक साथ सैकड़ों ड्रोन से अटैक करने की भी योजना बना रहे हैं. ऐसे में सेना कुछ ड्रोन को मार गिरा सकती है, लेकिन कुछ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. 

ऐसे में भारत के पास क्या विकल्प हैं? जब पुलवामा हमला हुआ तो भारतीय वायुसेना के 12 लड़ाकू सीमा पार करके गए और बालाकोट पर स्ट्राइक की. इससे पाकिस्तानी सेना और वायुसेना की बहुत किरकिरी हुई और पाकिस्तान को ये संदेश मिला कि अगर वो भारत में आतंक फैलाएगा तो नुकसान उसका भी होगा. तो ऐसे में अगर ये तय है कि ये इस तरह का आतंकी हमला पाकिस्तान प्रायोजित है तो अगर खून यहां बहा है, तो वहां भी बहेगा. इससे पाकिस्तान को पता चल जाएगा कि भारत का खून बहाने के लिए आतंकवाद सस्ता उपाय नहीं है.

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अगर भारत ऐसे संभावित ड्रोन हमलों से बचने के लिए रडार और जैमर खरीदने पर खर्च करेगा, तो उससे बहुत सारा पैसा खर्च हो जाएगा. इसलिए आतंकवाद से निपटने का एकमात्र सस्ता रास्ता यही है कि अगर आपका खून बहा है तो आतंकवादी और आतंकवाद के गढ़ का खून ज्यादा बहे. 

 

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