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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, पहाड़ पर राहत की तलाश... हिमाचल में बढ़ी सैलानियों की तादाद

दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पर्यटक काफी संख्या में शिमला, मनाली समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं. शिमला शहर में 70 फीसदी तक होटल बुक हो चुके हैं.

सैेलानियों से गुलजार हुए हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल सैेलानियों से गुलजार हुए हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हिमाचल के शिमला में 70 फीसदी होटल बुक
  • शिमला में सबसे कम 40, बद्दी में 109 है एक्यूआई

राजधानी दिल्ली के साथ ही देश के कई अन्य मैदानी राज्यों की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. प्रदूषित हवा के कारण लोगों का जीना दुश्वार हो गया तो दिल्ली और हरियाणा की सरकारों ने सख्त फैसले भी लिए. दिल्ली के साथ ही हरियाणा की सरकार ने भी गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत चार जिलों में एक हफ्ते के लिए स्कूल बंद कर दिया है. प्रदूषित हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी फटकार लगा चुका है, वहीं अब लोग भी स्वच्छ हवा की चाह में पहाड़ का रुख करने लगे हैं.

मैदानी राज्यों की आबोहवा में प्रदूषण का जहर घुला तो हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल पर्यटकों से गुलजार हो गए हैं. दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पर्यटक काफी संख्या में शिमला, मनाली समेत अन्य पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं. शिमला शहर में 70 फीसदी तक होटल बुक हो चुके हैं. 18 नवंबर के बाद कई होटलों में बुकिंग फुल है. शिमला पहुंचे पर्यटको का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण काफी ज्यादा है. ऐसे में राहत पाने के लिए उन्होंने हिमाचल का रुख किया है. दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है और प्रदूषण बढ़ने का कारण जहां दिवाली पर पटाखे जलाना है वही पराली जलाने से भी प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है.

अन्य राज्यो के मुकाबले हिमाचल प्रदेश की आबोहवा सबसे साफ है. यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स सबसे बेहतर है. हिमाचल में भी सबसे स्वच्छ आबोहवा की बात करें तो शिमला में स्थिति सबसे बेहतर है. हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के शिमला में AQI का स्तर 40, मनाली में 82, धर्मशाला में 43, सुंदरनगर में 50, ऊना 57, डमडाल में 53, परवाणु में 45, पांवटा साहिब में 86, कालाअंब में 57, बद्दी में 109 और नालागढ़ में प्रदूषण का स्तर 80 है.

हिमाचल प्रदेश के बद्दी, डमटाल, कालाअंब, नालागढ़, परवाणु जैसे शहर औद्योगिक क्षेत्र हैं और यहां बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियां हैं. लेकिन यहां पर भी AQI का स्तर संतोषजनक है. हिमाचल प्रदेश में AQI का लेवल 50 से 100 के बीच में है जिसे संतोषजनक माना जाता है. हिमाचल प्रदेश में प्रदूषण ना के बराबर होने का मुख्य कारण कम जगह उद्योग, अन्य राज्यों की तुलना में कम गाड़ियां और वन्य क्षेत्र का अधिक होना भी है. यहां पराली जलाए जाने की समस्या भी नहीं है.

दिल्ली 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' अभियान 19 से

दिल्ली में प्रदूषण के कारण लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' अभियान का दूसरा चरण 19 नवंबर से 3 दिसंबर तक चलाने का ऐलान किया है. दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ये जानकारी दी और कहा कि 18 अक्टूबर से 18 नवंबर तक रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था. ये अभियान 18 नवंबर को पूरा होने जा रहा है लेकिन अभी प्रदूषण की जो स्थिति बनी हुई है, उसको देखते हुए 19 नवंबर से 3 दिसंबर तक इसका दूसरा चरण चलाने का निर्णय लिया गया.

केजरीवाल सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने प्रदूषण में पराली के योगदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि एक ही हलफनामे में एक तथ्य बता रहा है कि प्रदूषण में पराली का योगदान 4 फीसद है और दूसरा तथ्य 35 से 40 फीसदी. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि प्रदूषण को लेकर सही रणनीति बन सके और इसका तात्कालिक और स्थायी समाधान निकाला जा सके.

हुई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमीशन की बैठक

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 16 नवंबर को एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमीशन की बैठक हुई जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में दिल्ली सरकार ने संपूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वर्क फ्रॉम होम लागू करने, निर्माण कार्य बंद करने और इंडस्ट्री बंद करने का प्रस्ताव रखा. इस बैठक में प्रदूषण के कारण बने हालात से निपटने के लिए अन्य राज्यों ने भी अपने सुझाव दिए.

 

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