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हरियाणा सरकार को SC की फटकार, कहा- आप सुप्रीम नहीं, कानून का शासन सर्वोपरि

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी हिमाकत करने पर आपके खिलाफ अवमानना का केस चलेगा. जस्टिस अरुण मिश्र की अगुवाई वाली बेंच ने हरियाणा सरकार को फटकारते हुए कहा कि आप सुप्रीम नहीं हैं, कानून का शासन ही सर्वोपरि है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे आर्काइव)
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे आर्काइव)

अरावली में निर्माण को मंजूरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए खट्टर सरकार को फटकार लगाई और कहा कि आदेशों के खिलाफ नया कानून लागू करने की कोशिश न करें.

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी हिमाकत करने पर आपके खिलाफ अवमानना का केस चलेगा. जस्टिस अरुण मिश्र की अगुवाई वाली बेंच ने हरियाणा सरकार को फटकारते हुए कहा कि आप सुप्रीम नहीं हैं, कानून का शासन ही सर्वोपरि है. कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप जंगल को नष्ट कर रहे हैं और यह अनुमन्य नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम जानते हैं कि इस कानून के ज़रिए हरियाणा सरकार अरावली और नीलगिरी की पहाड़ियों में वन नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माण को मान्यता देने का रास्ता साफ कर रही है. कोर्ट ने कहा कि इस नए कानून के ज़रिए आप अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता है, यह गंभीर मामला है.

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बता दें कि अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन के चलते राजस्थान के अरावली क्षेत्र से 31 पहाड़ियां विलुप्त होने पर हैरानी जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में अरावली की पहाड़ियों पर अंधाधुंध खनन पर सख्त नाराजगी जताते हुए सरकार से 48 घंटों में खनन रोकने को कहा था. सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने कहा था कि एप्का की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा की सीमा वाले इलाकों से 31 पहाड़ गायब हो गए हैं. आखिर जनता में तो हनुमान की शक्ति नहीं आ सकती कि वो पहाड़ ही ले उड़ें. ऐसे में इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ अवैध खनन ही है. कोर्ट के पूछने पर राजस्थान सरकार ने भी ये माना था कि अरावली में 115.34 हेक्टेयर जमीन पर खनन हुआ. 

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