सोनीपत के घूमड़ गांव का रहने वाला युवा किसान सचिन पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल सचिन ने पराली की समस्या का समाधान निकाल लिया है. युवा किसान पराली के अवशेषों से स्ट्रा बेलर (बंडल) बनाकर सीजन में फैक्ट्री, खुंबी फॉर्म, रिफाइनरी में बेचकर 6 से 7 लाख रुपये कमा रहा है. सचिन का कहना है कि वो किसानों को जागरूक कर उनके फसल के अवशेषों को खरीदकर स्ट्रा बेलर बनाकर बेचता है.
फसल की कटाई के बाद पराली एक बड़ी समस्या बन जाती है, किसान इसने जलाते हैं जिससे प्रदूषण फैलता है. पराली के धुएं से लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है. वहीं दूसरी तरफ खेतों में पराली जलाने से मिट्टी में पाए जाने वाले मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं. पराली जलाने से न केवल वायु दूषित होकर पर्यावरण को खतरा पैदा कर रहा है, बल्कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है. सरकार किसानों को जागरूक करने में लाखों रुपये खर्च कर रही हैं.
पराली बेचकर किसान कमा रहा है 6 से 7 लाख रुपये
वहीं, युवा किसान सचिन आसपास के गांव और जिलों के किसानों एक हजार रुपये में पराली को खरीदता है और 30 मिनट के अंदर सारे अवशेषों का स्ट्रा बेलर बनाकर बेच देता है. ऐसा कर वो हर सीजन में 6 से 7 लाख रुपये कमा रहा है. कृषि विभाग के अधिकारी नवीन हुड्डा का कहना है कि पराली से सोनीपत के गूमड़ निवासी सचिन जिले के लिए मिसाल बना हुआ है.
सचिन अबतक 600 एकड़ से ज्यादा पराली से स्ट्रा बेलर बना चुके हैं
पराली की समस्या से निपटने के लिए सरकार किसानों को सब्सिडी पर यह मशीन दे रही है. ताकि प्रराली का समाधान सही ढंग से हो सके. सचिन अबतक 600 एकड़ से ज्यादा पराली से स्ट्रा बेलर बना चुके हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, पराली जलाने से खेत में उपस्थित नाइट्रोजन का 100 फीसदी, फास्फोरस का 25 फीसदी, पोटाश का 20 फीसदी और सल्फर का 60 फीसदी नुकसान होता है.
इससे खेत की नमी भी मारी जाती है जिससे किसानों को दोहरा नुकसान होता है. इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी घट जाती है. आज देश में सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत तौर पर भी लोग इससे निपटने के रास्ते निकाल रहे हैं. ऐसे में यह बेलर मशीन हर लिहाज से फायदा सौदा साबित हो रही है.