गुजरातियों के नाम के साथ लगे 'भाई' और 'बेन' शब्द सुनकर बहुतों को हंसी आती है. गुजरात से बाहर के लोग तो अक्सर इस बात को लेकर चुटकी भी लेते हैं. लोग चाहे जो कहें लेकिन गुजरातियों के लिए ये शब्द कितना मायने रखते हैं इसका पता आपको इस बात से चल सकता है कि गुजरात के घनश्याम तलाविया ने इन्हीं शब्दों के लिए स्थानीय निकाय के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख कर लिया.
हाईकोर्ट चला गया व्यक्ति
तलाविया की शिकायत यह है कि उनके बार-बार गुजारिश करने के बावजूद लोकल म्युनिसिपैलटी ने उनके पिता के नाम में 'भाई' नहीं जोड़ा और न ही उनकी मां के नाम से गलती से लगा 'भाई' शब्द हटाया. खबर के मुताबिक, 'घनश्याम तलाविया का जन्म 30 अप्रैल, 1968 को हुआ था. हालांकि बर्थ सर्टिफिकेट में सौराष्ट्र म्युनिसिपैलटी ने उनकी डेट ऑफ बर्थ 29 अक्टूबर लिख दी ही. इतना ही नहीं, म्युनिसिपैलटी ने उनके पिता के नाम के आगे भाई शब्द भी नहीं लगाया जो कि गुजरात में एक सम्मानसूचक शब्द माना जाता है. इतना ही नहीं, उन लोगों ने उनकी मां के नाम के आगे बेन के बजाय भाई लिख दिया.
म्युनिसिपैलटी ने तलाविया द्वारा बार-बार अर्जी देने के बावजूद इसमें कोई सुधार ना करते हुए उल्टे ये दलील दी कि परिवार के रिकॉर्ड के मुताबिक ही उन्होंने सारी जानकारी दर्ज की है. दूसरी तरफ, घनश्याम का कहना है कि उनके बाकी सारी आइडेंटिटी कार्ड्स में उनकी डेट ऑफ बर्थ और माता-पिता का नाम सही-सही लिखा गया है, गलती सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट में है.
इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने ये निष्कर्ष निकाला कि म्युनिसिपैलटी का बर्थ सर्टिफिकेट की डीटेल्स में सुधार करने से इनकार करना नियमों का उल्लंघन है. कोर्ट ने इस बारे में म्युनिसिपैलटी को कोई नोटिस ना भेजते हुए सीधे गलतियों में सुधार करने का निर्देश दे दिया.