गुजरात के गांधीनगर जिले के कोबा गांव स्थित श्री महावीर आराधना केंद्र में हर साल की तरह इस साल भी 22 मई को दोपहर 2:07 बजे भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के ललाट पर सूर्य किरणों का तिलक हुआ. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और इस अलौकिक घटना के साक्षी बने.
श्रीपाल रसिकलाल शाह ने बताया कि यह आयोजन पूज्य आचार्य भगवंत कैलाश सागर सुरेश्वर जी महाराज की स्मृति में होता है. 39 साल पहले उनकी समाधि के दिन इस मंदिर का निर्माण खगोलीय गणना और वैज्ञानिक ढंग से इस तरह किया गया था कि हर साल 22 मई को 2:07 बजे सूर्य की किरणें भगवान महावीर के ललाट पर पड़ें.
महावीर स्वामी की प्रतिमा के ललाट पर सूर्य किरणों का तिलक
पिछले 38 सालों से यह घटना बिना चूके हो रही है. यही वजह है कि श्रद्धालु हर साल इस दिन मंदिर पहुंचते हैं. इस बार कार्यक्रम में गुजरात के पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह चूडासमा भी मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि वह पिछले 18 वर्षों से इस चमत्कारिक दृश्य के साक्षी बनते आ रहे हैं.
अद्भुत नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे
उन्होंने कहा कि विज्ञान जहां खत्म होता है, श्रद्धा वहां से शुरू होती है. यह सूर्य तिलक न तो बीते दिन हुआ और न ही आने वाले दिन होगा. यह सिर्फ 22 मई को ही संभव होता है, जिसे लोग एक ऐश्वर्य चमत्कार मानते हैं.