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गुजरात: पैतृक गांव में सुपुर्द-ए-खाक हुए अहमद पटेल, राहुल गांधी रहे मौजूद

कांग्रेस नेता अहमद पटेल को भरूच जिले के उनके पैतृक गांव में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. अंतिम संस्कार के दौरान कोरोना नियमों का पालन किया गया.

स्टोरी हाइलाइट्स
  • पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
  • राहुल गांधी, अधीर रंजन रहे मौजूद
  • कोरोना की वजह से हुआ था निधन

कांग्रेस के दिग्गज और पार्टी के संकटमोचक अहमद पटेल के शव को कोविड-19 दिशानिर्देशों के साथ गुजरात के भरूच जिले में उनके पैतृक गांव में सुपुर्दे-खाक कर दिया गया. उनकी अंत्येष्टि में राहुल गांधी समेत पार्टी के कई शीर्ष राष्ट्रीय नेता मौजूद रहे. पटेल का अंतिम संस्कार पैतृक गांव पिरमान में सुन्नी वोहरा मुस्लिम जमात कब्रिस्तान में किया गया.

अहमद पटेल का बुधवार सुबह कोविड संक्रमण के बाद हुईं जटिलताओं के चलते निधन हो गया था. वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे, जहां से उनका शव वडोदरा ले जाया गया और वहां से अंकलेश्वर के अस्पताल ले जाया गया जहां शव को गुरुवार सुबह तक रखा गया. उनके आवास पर 10 मिनट के लिए शव ले जाने के बाद कब्रिस्तान का रुख किया गया.

मृतक के लिए की जाने वाली अंतिम नमाज के बाद अहमद पटेल के शव को उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों ने दफनाया, जिनमें से अधिकांश लोग पीपीई पहने हुए थे. अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन करने हजारों लोग कब्रिस्तान में आने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें कोविड-19 दिशानिर्देशों के तहत पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करके नियंत्रित किया.

अंतिम संस्कार में राष्ट्रीय कांग्रेस के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल थे, जो गुरुवार की सुबह सूरत हवाई अड्डे पर उतरे थे. उनके अलावा पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गुजरात प्रभारी राजीव सातव, वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री, राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल भी शामिल थेय

गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति (जीपीसीसी) के अध्यक्ष अमित चावड़ा, गुजरात राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी, सिद्धार्थ पटेल, अर्जुन मोडवाडिया, जीपीसीसी के वकिर्ंग प्रेसिडेंट हार्दिक पटेल पार्टी समेत सैकड़ों कार्यकर्ता भी अंतिम संस्कार में मौजूद थे. गुजरात के पूर्व सीएम शंकरसिंह वाघेला और राज्य विधानसभा में निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी भी नेता को विदाई देने के लिए कब्रिस्तान में थे.

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