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'अस्थायी मरम्मत करके पुल खोल देंगे', सामने आया Oreva का लेटर, रिपेयर के लिए नहीं खरीदा था कोई नया सामान

गुजरात के मोरबी में हुए भयंकर हादसे ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं. ओरेवा कंपनी, जिसने रिनोवेशन किया था, उस पर भी कई तरह के आरोप हैं. अब उन आरोपों के बीच ओरेवा कंपनी का ही एक लेटर सामने आया है जो मोरबी के कलेक्टर को लिखा गया था. उस लेटर में कहा गया है कि अगर ओरेवा कंपनी को ब्रिज का परमानेंट कॉन्ट्रेक्ट नहीं मिला तो पुल की पूरी मरम्मत नहीं हो पाएगी.

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मोरबी हादसा (पीटीआई)
मोरबी हादसा (पीटीआई)

गुजरात के मोरबी में हुए भयंकर हादसे ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं. ओरेवा कंपनी, जिसने रिनोवेशन किया था, उस पर भी कई तरह के आरोप हैं. अब उन आरोपों के बीच ओरेवा कंपनी का ही एक लेटर सामने आया है जो मोरबी के कलेक्टर को लिखा गया था. उस लेटर में कहा गया है कि अगर ओरेवा कंपनी को ब्रिज का परमानेंट कॉन्ट्रेक्ट नहीं मिला तो पुल की पूरी मरम्मत नहीं हो पाएगी.

ओरेवा का मोरबी कलेक्टर को लेटर

अब जानकारी के लिए बता दें कि ओरेवा कंपनी की तरफ से दो साल पहले 20 अगस्त को मोरबी के कलेक्टर को ये लेटर लिखा गया था. इस लेटर में ओरेवा ने लिखा था कि अगर कंपनी को मोरबी के सस्पेंशन ब्रिज का परमानेंट कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलेगा तो ऐसी स्थिति में सही तरीके से पूरा रिपेयर नहीं हो पाएगा. सिर्फ अस्थायी काम किया जाएगा.

चिट्ठी में यहां तक कहा गया है कि अगर सिर्फ रिपेयरिंग का ही काम होने वाला है, उस स्थिति में कंपनी कोई भी मटेरियल या सामान मरम्मत के लिए ऑर्डर नहीं करेगी. शर्त ये रखी गई कि जबतक परमानेंट कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलेगा, काम भी पूरा नहीं किया जाएगा. ओरेवा कंपनी ने लेटर में ये साफ लिखा है कि वो सिर्फ अस्थाई रिपेयर कर ही इस ब्रिज को खोल देगी.

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अब इस चिट्ठी का सामने आना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है. क्या परमानेंट कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिलने की वजह से ओरेवा ने अपना काम ठीक तरह से नहीं किया? क्या जिस प्रकार के मटेरियल का इस्तेमाल होना था, रिपेयर में जिन चीजों की जरूरत पड़नी थी, क्या उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया? जो चिट्ठी सामने आई है, वो तो मोरबी के कलेक्टर से लेकर ओरेवा कंपनी को कटघरे में खड़ा करती है.

कॉन्ट्रैक्ट को लेकर नाराजगी और लापरवाही?

यहां ये समझना भी जरूरी हो जाता है कि पहले ओरेवा कंपनी ने मोरबी के कलेक्टर से मुलाकात की थी. उस मुलाकात में भी इसी सस्पेंशन ब्रिज वाली डील पर मंथन हुआ था. उसके बाद ही कलेक्टर को ये चिट्ठी लिखी गई. चिट्ठी में इस बात पर नाराजगी जाहिर की जा रही है कि कलेक्टर कंपनी को परमानेंट कॉन्ट्रैक्ट नहीं दे रही है.

मोरबी हादसे की बात करें तो इसमें 135 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. कई लोग घायल भी हैं जिनका मोरबी के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घायलों से अस्पताल में मुलाकात की है. उनकी तरफ से घटनास्थल का मुआयना भी किया गया था. बाद में एक हाई लेवल मीटिंग हुई जिसमें पीएम ने हादसे की विस्तृत जांच के आदेश दिए.

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