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कारोबार में आई मंदी से आर्थिक तंगी का शिकार हुआ सूरत का बिल्डर, की खुदकुशी

आर्थिक तंगी की वजह से सूरत के एक बिल्डर ने खुदकुशी कर ली है. बिल्डर का नाम हरेश भाई शामजी भाई रवाणी है. हरेश भाई ने कामरेज इलाके के एक फॉर्म हाऊस में फांसी लगाकर खुदकुशी की है. 

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

  • प्रयागराज में आर्थिक तंगी से परेशान वायुसेना के पूर्व कर्मचारी ने लगा थी फांसी
  • अब आर्थिक तंगी की वजह से सूरत के एक बिल्डर ने खुदकुशी कर ली है

आर्थिक तंगी की वजह से सूरत के एक बिल्डर ने खुदकुशी कर ली है. बिल्डर का नाम हरेश भाई शामजी भाई रवाणी है. हरेश भाई ने कामरेज इलाके के एक फॉर्म हाऊस में फांसी लगाकर खुदकुशी की है. लंबे समय से कारोबार में आई मंदी की वजह से बिल्डर हरेश आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे.

बताया जा रहा है कि हरेश भाई ने अपने प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए प्राइवेट फाइनेंसरों से ब्याज पर करोड़ों रुपये लिए थे, जिन्हें चुकता नहीं कर पाने के कारण हरेश ने खुदकुशी कर ली.

इससे पहले यूपी के प्रयागराज में आर्थिक तंगी से परेशान होकर वायुसेना के पूर्व कर्मचारी ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी. मृतक ने जान देने की वजह देश में मंदी और भ्रष्टाचार को बताया है. साथ ही उसने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को इन हालात का जिम्मेदार ठहराया है. मृतक के पास से चार पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है. पुलिस ने घरवालों को सूचना देकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है.

मंदी का असर यह है कि ऑटो सेक्टर की मंदी से परेशान कंपनियां लगातार उत्पादन में कटौती, काम के घंटे कम करने जैसे उपाय करने में लगी हैं. अब हिंदुजा समूह की ऑटो कंपनी अशोक लीलैंड ने सितंबर में अपने प्लांट्स में 5 से 18 दिन तक कामकाज बंद रखने का ऐलान किया है.  कंपनी ने इसके लिए कमजोर मांग को वजह बताई है. कंपनी देश के अपने सभी प्लांट में कामकाज के दिन घटा रही है.

कंपनी ने सबसे ज्यादा पंतनगर में 18 दिनों के लिए कामकाज बंद करने का फैसला किया है. इसके अलावा अलवर में 10 दिन,  भंडारा में 10 दिन, एन्नोर में 16 दिन और होसुर के प्लांट में 5 दिन कामकाज बंद रखने का फैसला किया गया है.

गौरतलब है कि देश की ऑटो इंडस्‍ट्री बुरे दौर से गुजर रही है. ऑटो इंडस्ट्री में जारी सुस्ती के बीच मारुति सुजुकी इंडिया के 3000 से ज्यादा अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी चली गई है.

कामकाज बंद करने से पहले अशोक लीलैंड ने भी कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के लिए ऑफर दिया है. बता दें कि प्रोडक्शन और बिक्री में भारी गिरावट की वजह से अप्रैल माह से अब तक ऑटो सेक्टर में करीब 2 लाख से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं.

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