गुजरात की बीजेपी सरकार विकास और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावे तो करती है, लेकिन उसके मंत्री अपनी संपत्ति की जानकारी देने से कतरा रहे हैं. सरकार ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों की संपत्ति का ब्यौरा देने से इनकार कर दिया है. एक आरटीआई के जवाब में आनंदीबेन पटेल सरकार ने चौंकाने वाला यह जवाब दिया है.
दरअसल मुंबई के आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और सभी मंत्रियों की संपत्ति का पिछले 5 साल का ब्यौरा मांगा था. इस पर सरकार ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि मंत्रियों और मुख्यमंत्री की संपत्ति उनका निजी मामला है और इसका जनहित से कोई संबंध नहीं है.
अनिल गलगली का कहना है कि प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्रियों की संपत्ति भी सार्वजनिक करने की बात कह रहे हैं, यहां तक कि आईएएस अधिकारियों की संपत्ति को सार्वजनिक करने की कोशिश कर रहे हैं, फिर गुजरात सरकार इससे क्यों इनकार कर रही है. कहीं न कहीं गुजरात में सूचना के अधिकार का कत्ल हो रहा है.
अनिल गलगली ने इस बारे में गुज़रात सरकार से अपील की है. अगर फिर भी वहां से जानकारी नहीं मिलती तो वह राज्य सूचना आयोग से गुहार लगाने की तैयारी में हैं. गौरतलब है कि मंत्रियों की संपत्ति को सार्वजनिक करने की मांग काफी समय से की जा रही है.
मोदी की नई वेबसाइट पर लिखा है, 'पारदर्शिता और जवाबदेही जनपक्षीय सरकार के दो प्रमुख आधार स्तंभ हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें पूरा यकीन करते हैं. पारदर्शिता और जवाबदेही न सिर्फ सरकार को लोगों के करीब लाती है बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाती है.'