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गुजरात: 10 बार MLA रहे ये कोंग्रेसी नेता अब नहीं लड़ेंगे चुनाव, पूर्व CM को दे चुके हैं मात

गुजरात विधानसभा चुनाव में  रंग आना अभी से शुरू हो गया है. छोटा उदयपुर से विधायक मोहन सिंह राठवा चुनाव नहीं लड़ेंगे. वे नए लोगों को राजनीति में आने का मौका देंगे. ये ऐलान खुद उन्होंने किया है.

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मोहन सिंह राठवा
मोहन सिंह राठवा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चुनाव नहीं लड़ने की थी चर्चा
  • युवाओं को मौका देने की बात कही

गुजरात विधानसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं. वैसे में छोटा उदयपुर से विधायक और गुजरात के सबसे वरिष्ठ विधायक मोहन सिंह राठवा ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने युवाओं को मौका देने की बात भी कही है. गुजरात के छोटा उदयपुर के सबसे वरिष्ठ और मौजूदा विधायक मोहन सिंह राठवा ने ऐलान किया है कि वह अभी चुनाव नहीं लड़ेंगे और नौ युवाओं को मौका मिलना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि मैंने लगातार 11 बार चुनाव लड़ा, जिसमें से मैं 10 बार जीता हूं और जेतपुर पावी, बोडेली और छोटा उदयपुर तालुका के मतदाताओं ने मुझे सबसे अधिक बार जीताकर गुजरात विधानसभा में भेजा है. मैं अब 76 साल का हो गया हूं.

युवाओं को मिलना चाहिए मौका
उन्होंने कहा, अब युवा नेताओं की जरूरत है जो गांव-गांव जा सकता है, लोगों के लिए दौड़ सके. उन्होंने कहा कि छोटा उदयपुर तालुका में 3 गांवों में छोटे बच्चों के प्राथमिक विद्यालयों में जाने का कोई रास्ता नहीं है, मैंने कई बार विधानसभा में इसकी मांग की है. लेकिन अब जब नए युवा उम्मीदवार तैयार हो गए हैं और शेष प्रश्नों का समाधान लेकर आए हैं, तो मुझे लगता है कि युवाओं को मौका दिया जाना चाहिए.

चुनाव नहीं लड़ने की थी चर्चा
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से शहर में यही चर्चा थी कि मोहनसिंह राठवा चुनाव नही लड़ेंगे और आखिरकार खुद मोहनसिंह ने खुद ही मीडिया के सामने आके कह दिया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. दूसरी और  मोहन सिंह राठवा के मंझोले पुत्र राजेंद्र सिंह राठवा गांवो में शादियों, भजनों में शामिल होकर मतदाताओं से लगातार संपर्क में नजर आ रहे हैं तो दूसरी तरफ राज्यसभा सांसद नारन राठवा के बेटे व छोटा उदयपुर नगर पालिका अध्यक्ष संग्राम सिंह राठवा हैं जो कांग्रेस से दावा कर रहे हैं. अब छोटा उदयपुर विधानसभा का टिकट कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है. क्योंकि छोटा उदयपुर के दो दिग्गज कोंग्रेस नेताओं के पुत्र छोटा उदयपुर विधानसभा के चुनाव लड़ना चाहते हैं.

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मोहन सिंह राठवा का करियर

1965 की साल में सतुन ग्रुप ग्राम पंचायत का सरपंच चुना गया

1972 की साल में मानेक तड़वी को हराकर जनता पार्टी से वो पहली बार विधायक चुनकर आए.
पहली बार तड़वी को हराया और जनता पार्टी की जेतपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए.

1975 की साल में छोटा उदयपुर जिले की जेतपुर सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल को हराने के बाद वे दूसरी बार जनता पार्टी के विधायक बने और बाबूभाई जशभाई पटेल की सरकार में मत्स्य पालन मंत्री बने.

1980  में उन्होंने जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और तीसरी बार विधायक बने.

1985 की साल मे  यह चौथी बार है जब वह जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विधायक बने.

1990 में वह जनता दल के उम्मीदवार के रूप में पांचवीं बार विधायक बने और गुजरात सरकार में पंचायत और वन मंत्री बने.

वह 1995  साल में छठी बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधायक बने.

1998  में सातवीं बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधायक बने.

2007  में वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में आठवीं बार विधायक बने.

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2012 में वह कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में नौवीं बार विधायक बने.

2012 में वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में दसवीं बार विधायक बने.


गौरतलब है कि मोहनसिंह राठवा दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा, 1980 में और 1985  में छोटा उयदयपुर में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार अमरसिंह राठवा के खिलाफ चुनाव लड़ा और अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार हार का सामना करना पड़ा था. 

2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के बीच मोहन सिंह राठवा को भाजपा के वेछतभाई बारिया ने रोक दिया था. लेकिन उसके बाद वो जीतते आ रहे थे.

नरेंद्र पेपरवाला की रिपोर्ट

 

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