अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 1200 बेड के एक अस्पताल को कोविड-19 हॉस्पिटल के तौर पर घोषित किया गया है. इस हॉस्पिटल से निकलने वाले वेस्ट को वायरस से मुक्त करना बेहद मुश्किल काम है. अहमदाबाद सिविल अस्पताल से हर रोज 800 किलो घन कचरे को कीटाणु मुक्त किया जाता है.
कोविड-19 के मरीजों द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को वायरस से मुक्त करना बड़ी समस्या है. कोरोना ग्रस्त मरीजों द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों से ज्यादा संक्रमण न फैले इसके लिए सोडियम हायपोक्लोराइड लिक्विड के जरिए कचरे को संक्रमण मुक्त किया जाता है. इनमें रोज इस्तेमाल होने वाली 2500 पीपीई किट, 1500 मास्क, डिस्पोजल ग्लास, इंजेक्टेड निडिल और कॉटन जैसी कई चीजें शामिल हैं. इन्हें पहले विषाणुमुक्त किया जाता है, फिर डिस्पोज किया जाता है.
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कचरे से फैल सकता है संक्रमण
अहमदाबाद के कोविड अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर संजय कपाड़िया का कहना है कि कोरोना के मरीज और उनका इलाज कर रहे डॉक्टर-मेडिकल स्टाफ जो कपड़े इस्तेमाल में लाते हैं, उनसे भी कोरोना फैलने की आशंका होती है.
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कपड़ों को संक्रमण से मुक्त करने के लिए पहले सोडियम हायपोक्लोराइड में सभी कपड़ों और कचरों को डुबोया जाता है. 30 मिनट तक लिक्विड में ही रखा जाता है, फिर कपड़े संक्रमण मुक्त होते हैं. जो लोग सफाई के काम में जुटे होते हैं, उन्हें हैंड ग्लब्स और मास्क दिया जाता है, जिससे वे खुद संक्रमण से बचे रहें.
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एक शिफ्ट में इकट्ठा होता है 250 किलो कचरा
कोरोना वार्ड में 8 घंटे की शिफ्ट होती है. एक शिफ्ट में 250 किलो कचरा इकट्ठा होता है. सिविल अस्पताल में कुल 12 क्रिटिकल वार्ड और 18 स्टेबल पेशेंट वार्ड बनाए गए हैं. अस्पतालों के लिए बड़ी चुनौती कोरोना कचरे को संक्रमण मुक्त करना बना हुआ है.