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Gujarat: बस को ही बना दिया स्कूल, क्लास रूम तैयार करने में जानिए कितना आया खर्च

अक्सर बच्चों को बस में सवार होकर स्कूल जाते देखा होगा. मगर, सूरत में एक निजी स्कूल के संचालक ने बस को ही स्कूल में बदल दिया है. इस बस में छोटे बच्चों की पढ़ाई में उपयोगी होने वाला वह सारा सामान मौजूद है, जो एक स्कूल में होता है. गुजरात के शिक्षा राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने इसका शुभारंभ किया.

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बस में क्लासरूम
बस में क्लासरूम

गुजरात के सूरत में चलते-फिरते स्कूल की शुरुआत की गई है. इसका नाम स्वामी स्मृति विद्या मंदिर है. इसको विद्या कुंज और विद्या दीप ग्रुप ने मिलकर तैयार किया है. इसमें क्लास रूम जैसी तमाम सारी सुविधाएं दी गई हैं. यह गुजरात का पहला चलता-फिरता स्कूल है. इस स्कूल बस को आठ लाख से अधिक की लागत से तैयार किया गया है.

स्कूल बस की शुरुआत गरीब और फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा देने के लिए की गई है. इस बस में क्लासरूम जैसा माहौल तैयार किया गया है. बस के अंदर की सीटों को हटाकर बच्चों के बैठने के लिए बेंच लगाई गई हैं.

साथ ही क्लास रूम की तरह बोर्ड लगाया गया है. इसमें बच्चों के मनोरंजन और ज्ञान के लिए टीवी भी लगाया गया है. इसके साथ ही बच्चों के खेलने का सामान भी स्कूल बस में रखा गया है. 

बस में तमाम सुविधाएं
बस में पढ़ने-लिखने के लिए तमाम तरह की सुविधाएं दी गई हैं.

शिक्षा राज्य मंत्री ने बच्चों से की बातचीत और पढ़ाया

स्कूल बस के उद्घाटन के दौरान बच्चों को इसमें बैठाया भी गया था. उनके साथ गुजरात सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री भी थे और उन्होंने बच्चों से बातचीत की थी. साथ ही उन्हें पढ़ाया भी था. शिक्षा राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा कि बस में चलता-फिरता स्कूल गुजरात में पहला स्कूल है. शिक्षा से वंचित रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए बहुत ही खूबसूरत प्रयास है. 

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ऐसे ही बसों में और स्कूलों की शुरुआत की जाएगी- शिक्षा राज्य मंत्री

शिक्षा राज्यमंत्री ने आगे कहा कि कोशिश की जाएगी कि इस तरह की पहल का पूरे राज्य में अमल हो. इस मामले में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का भी ध्यान आकर्षित किया जाएगा. इसके बाद राज्य के सभी सामाजिक संगठन और निजी स्कूलों, अलग-अलग ट्रस्टों के साथ बातचीत और मीटिंग की जाएगी. साथ ही ऐसे ही बसों में स्कूल को शुरू करने की कोशिश की जाएगी.

फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के बीच रहकर सेवा करने का निर्णय लिया

बस स्कूल की शुरुआत करने वाले महेश भाई पटेल ने बताया कि अहमदाबाद में आयोजित प्रमुख स्वामी जनशताब्दी महोत्सव में वह नहीं पहुंच सके थे. इसका उनको दुख था. इसके चलते 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक गरीबों के साथ फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के बीच रहकर सेवा करने का निर्णय किया. एक महीने तक अलग-अलग गरीब परिवारों को उन्होंने राशन की किट बांटी और शाम को उनके साथ भोजन किया. 

बस में तमाम सुविधाएं
बस में बच्चों के बैठने के लिए लगाई गई हैं बेंच.

अलग-अलग विद्यार्थियों को रोज पढ़ाया जाएगा

महेश भाई ने कहा कि उस समय उनको लगा कि गरीब और घूमने फिरने वाली जाति के बच्चों की शिक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. इसके चलते उन्होंने चलती फिरती स्कूल बस शुरू करने का विचार किया. इस चलती फिरती स्कूल बस में अलग-अलग विद्यार्थियों को रोज पढ़ाया जाएगा.

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फिलहाल, यह बस सूरत के अडाजन और रांदेर इलाकों के गरीब बच्चों को पढ़ाकर उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित करेगी. जो बच्चे आगे पढ़ना चाहते हैं, उन्हें स्कूल में एडमिशन भी करवाने की प्रक्रिया की जाएगी.

बस में एक साथ 32 बच्चे कर सकेंगे पढ़ाई

महेश भाई ने आगे बताया कि इस बस में एक साथ 32 बच्चे पढ़ाई कर सकेंगे. स्कूल बस में पढ़ने वाले बच्चों को बस में बैठाकर गार्डन, मंदिर परिसर, स्कूल के परिसर, पानी और वॉशरूम की जहां व्यवस्था होगी, वहां पर स्कूल बस को रोककर पढ़ाया जाएगा.

इसके अलावा बड़े बच्चों को इलेक्ट्रिक, प्लंबिंग सहित तमाम हुनर सिखाए जाएंगे. इससे वे रोजगार भी हासिल कर सकेंगे. बस स्कूल में शिक्षकों की तनख्वाह, डीजल, नाश्ता वगैरह को मिलाकर कुल 8 लाख 64 हजार का खर्च किया गया है.

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