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मूंछों की देखभाल के लिए इस कैंडिडेट को लगता है एक घंटे का समय

बनासकांठा से उम्मीदवार मगनभाई सोलंकी की मूछों की खूब चर्चा है. मगनभाई जहां जाते हैं उन्हें देखने के लिए भीड़ जुट जाती है. मगनभाई हिम्मतनगर के हाजीपुर के पास आये गांव के रहने वाले हैं. मगनभाई से जब उनकी मूंछों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मूंछें तो सेना के जवान की शान होती है. सेना में भर्ती होने के समय से ही उन्होंने मूंछे रखनी शुरू कर दी थीं.

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2.5 फीट लंबी मूंछ वाला उम्मीदवार बनासकांठा से आजमा रहा किस्मत (फोटो-गोपी)
2.5 फीट लंबी मूंछ वाला उम्मीदवार बनासकांठा से आजमा रहा किस्मत (फोटो-गोपी)

देशभर में चुनावी माहौल बना हुआ है और कई उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. ऐसे ही एक उम्मीदवार हैं जो गुजरात के साबरकांठा में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन उनकी चर्चा उनकी दावेदारी से ज्यादा उनकी मूंछों को लेकर है. उन्हें मूछों की देखभाल में हर रोज एक घंटे का समय देना पड़ता है.

साबरकांठा लोकसभा क्षेत्र में कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं जिसमें 10 उम्मीदवार तो किसी न किसी राजनीतिक दल से संबंधित हैं तो वहीं 10 उम्मीदवार बतौर निर्दलीय मैदान में हैं और चुनावी समर में ताल ठोंक रहे हैं. हालांकि यहां की लड़ाई में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है.

नायब सूबेदार के पद से रिटायर

इसी साबरकांठा सीट पर जिस उम्मीदवार की चर्चा सबसे ज्यादा है वो हैं मगनभाई लाखाभाई सोंलकी. मगनभाई लाखाभाई सोंलकी भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद से रिटायर हैं और इस बार राजनीतिक समर में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

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मगनभाई इन दिनों अपने चुनावी क्षेत्र में चुनाव से ज्यादा अपनी मूंछों की वजह से लोगों में चर्चा का विषय बने हुए हैं. उनकी मूंछ 2.5 फीट लंबी है और वह जब भी चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं तो कौतूहल से उनकी ओर देखने लगते हैं. उनकी रौबदार मूंछों को देखकर मतदाता अनायास ही कह डालते हैं, 'मूंछे हों तो मगनलाल जैसी वरना ना हों.'

साबरकांठा लोकसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले मगनभाई सोलंकी ने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था, यही नहीं उनकी पोस्टिंग श्रीलंका में भी हुई थी. उन्हें अब तक अदम्य साहस और कर्तव्य के लिए 6 पदक भी मिल चुके हैं. किसानों का कर्जमाफी, बेरोजगारी और किसानों के फसल बीमा को लेकर उन्होंने साबरकांठा से अपना आंदोलन शुरू किया.

मगनभाई सोलंकी की मूछों को देखने को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और भीड़ भी एकत्र हो जाती है. मगनभाई हिम्मतनगर के हाजीपुर के पास आये गांव के रहने वाले हैं. मगनभाई से जब उनकी मूंछों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मूंछें तो सेना के जवान की शान होती है. सेना में भर्ती होने के समय से ही उन्होंने मूंछे रखनी शुरू कर दी थी जो 33 साल बाद बढ़कर आज 2.5 फीट लंबी हो गई हैं. मूंछों की देखभाल के बारे में मगनभाई का कहना है कि इसके लिए हर रोज एक घंटा लगता है.

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