गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की बेटी अनार पटेल के बिजनेस सहयोगी को मिली सरकारी जमीन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अनार पटेल के सहयोगी को 422 एकड़ जमीन 15 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब मिली थी. उस वक्त इस जमीन की स्टाम्प ड्यूटी 180 रुपये वर्ग मीटर वसूला जाता था. यानी स्टाम्प ड्यूटी से भी 91.6 फीसदी कम में ये जमीन दे दी गई.
2010 का है मामला
अनार पटेल के बिजनेस पार्टनर दक्षेश शाह और अमोल सेठ की कंपनी वाइल्डवुड्स को 2010 में ये जमीन आवंटित हुई थी. ये जमीन अमरेली में गीर लायन सेंचुरी के पास है.
एक जमीन के लिए दो रेट
जिस इलाके में अनार पटेल के बिजनेस पार्टनर को ये जमीन मिली है, उसी इलाके में मुरलीधर गौ सेवा ट्रस्ट ने जमीन के लिए आवेदन किया था. इस ट्रस्ट को 671 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन मिली.
जमीन का लैंड यूज भी बदला
दोनों जमीन को लेकर आवंटन के फैसले पर मुहर एक ही सरकारी बैठक में लगी थी. लेकिन दोनों के लिए रेट अलग-अलग तय किए गए. जांच में ये भी तथ्य सामने आया कि खेती की जमीन का लैंड यूज भी बदला गया. ताकि कंपनी वहां रिजॉर्ट बना सके.
कमेटी ने साधी चुप्पी
हालांकि जमीन मुहैया कराने वाली कमेटी का कहना है कि जिस इलाके में अनार पटेल के सहयोगी को जमीन मिली है उस इलाके में स्टांप ड्यूटी 180 रुपये वर्ग मीटर है. लेकिन फिर वाइल्डवुड्स कंपनी 15 रुपये वर्ग मीटर कैसे दे दी गई इसका उनके पास जवाब नहीं है.
नियम के मुताबिक मिली जमीन
कमेटी का कहना है कि वाइल्डवुड्स कंपनी को जमीन देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और कोई सरकारी दबाव भी नहीं था. सबकुछ कानून के दायरे में हुआ है.
आनंदीबेन पर आंच
गौरतलब है कि 2010 में जब ये जमीन आवंटित हुई थी उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और आनंदीबेन पटेल उस वक्त राजस्व मंत्री थीं.