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दुकानदार का आरोप, सीलिंग शुरू होने के बाद भी एमसीडी लेती रही कन्वर्जन चार्ज

अदिति ने बताया कि उनके पिता ने एमसीडी के अधिकारियों के कहने पर बाक़ायदा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से तीस हज़ार छह सौ अस्सी रुपये डिमांड ड्राफ़्ट एमसीडी के नाम से बनवाया और 21 फ़रवरी को जमा कर दिया. इसके बाद एमसीडी के अधिकारियों ने बताया कि ये कन्वर्जन चार्ज देने के बाद सीलिंग नहीं होगी. लेकिन 8 मार्च को लाजपतनगर पार्ट फ़ोर अमर कॉलोनी में हुई सीलिंग की कार्रवाई के दौरान उनकी दुकान भी सील कर दी गई.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में सीलिंग शुरू होने के बाद भी साउथ एमसीडी द्वारा कन्वर्जन चार्ज लेने का मामला सामने आया है. दिल्ली की रहने वाली अदिति ओबेरॉय की लाजपत नगर पार्ट फ़ोर में दुकान है. दिसंबर में सीलिंग शुरू होने के बाद अदिति के पिता, जो रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं, ने साउथ एमसीडी के दफ़्तरों के चक्कर काटने शुरू कर दिये ताकि उनकी बेटी की दुकान पर आंच ना आए.

अदिति ने बताया कि उनके पिता ने एमसीडी के अधिकारियों के कहने पर बाक़ायदा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से तीस हज़ार छह सौ अस्सी रुपये डिमांड ड्राफ़्ट एमसीडी के नाम से बनवाया और 21 फ़रवरी को जमा कर दिया. इसके बाद एमसीडी के अधिकारियों ने बताया कि ये कन्वर्जन चार्ज देने के बाद सीलिंग नहीं होगी. लेकिन 8 मार्च को लाजपतनगर पार्ट फ़ोर अमर कॉलोनी में हुई सीलिंग की कार्रवाई के दौरान उनकी दुकान भी सील कर दी गई.

मार्केट एसोसियेशन के मनीष अग्रवाल ने आरोप लगाया कि एमसीडी के किसी अधिकारी को कोई जानकारी नहीं है और कन्वर्जन चार्ज की रसीद दिखाने के बावजूद दुकानें सील की गई. मनीष वे कहा कि अगर किसी अधिकारी को सीलिंग से संबंधित किसी भी क़ानून की जानकारी हो तो वो तुरंत दुकानदारों तक पहुंचाएं क्योंकि कन्वर्जन चार्ज देकर दुकानें सील होते देखना व्यापारियों के लिये सबसे बड़ा सदमा है.  व्यापारियों ने ये भी मांग की कि जिन अधिकारियों ने उनसे झूठा चार्ज लिया, उनके ऊपर भी मुक़दमे दर्ज किया जाए.

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