लैंडफिल साइट से निकलने वाली मिथेन गैस को अब नॉर्थ एमसीडी जलाकर वातावरण में घुलने से रोकेगी. नॉर्थ एमसीडी कमिश्नर पीके गोयल ने इस बाबत अधिकारियों को निर्देश भी दे दिए हैं.
कमिश्नर पीके गोयल ने गुरुवार को हेल्थ कमेटी चेयरमैन राजपाल राणा, इंजीनियर इन चीफ विजय प्रकाश और जनसंपर्क और सूचना निदेशक योगेंद्र सिंह मान के साथ भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा किया. भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा करने के बाद कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लैंडफिल साइट से प्राकृतिक रूप से बन रही मिथेन गैस को पाइप डालकर कैद किया जाए और फिर उसे जला दिया जाए ताकि वो वातावरण में ना घुल सके.
कमिश्नर के मुताबिक यदि ऐसा करने में एमसीडी सफल हो जाती है तो मिथेन गैस से हो रहे मुकसान को 20 फीसदी तक कम किया जा सकता है. तो वहीं मिथेन गैस के कारण लैंडफिल साइट पर बार-बार लगने वाली आग पर भी काबू पाया जा सकेगा.
कमिश्नर ने इसके साथ ही अधिकारियों को कहा कि वो फ्लड कंट्रोल विभाग से बात करें कि भलस्वा लैंडफिल साइट पर पड़े कूड़े को वो बख्तावरपुर से आउटर रिंग रोड तक की रोड के चौड़ीकरण के लिए इस्तेमाल करें. आपको बता दें कि इससे पहले एमसीडी नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ करार कर चुकी है जिसके तहत गाज़ीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े का इस्तेमाल एनएच 24 के चौड़ीकरण के लिए होगा.
दिल्ली का सिरदर्द है लैंडफिल साइट्स
गौरतलब है कि दिल्ली की तीनों लैंडफिल साइट्स अपनी क्षमता से ज़्यादा भरी जा चुकी हैं. इनसे निकलने वाली मिथेन गैस से दिल्ली की हवा तो ज़हरीली हो ही रही है वहीं गर्मियों के मौसम में मिथेन गैस के कारण
लैंडफिल साइट पर आग लगने के कारण जो धुंआ निकलता है उससे प्रदूषण भी कई गुना बढ़ जाता है.