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निर्भया केस: अक्षय ठाकुर की रिव्यू पिटिशन पर SC में सुनवाई आज

फांसी की सजा पाए चारों आरोपियों में से एक अक्षय ठाकुर ने सर्वोच्च अदालत से रहम की गुहार लगाई है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में निर्भया के माता-पिता भी मौजूद रहे. करीब दस मिनट की सुनवाई के बाद ही इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

  • मंगलवार को करीब दस मिनट तक चली सुनवाई
  • पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई से अलग हुए CJI

दिल्ली में हुए निर्भया कांड के 4 दोषियों में से एक अक्षय ठाकुर की रिव्यू पिटिशन पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुबह 10.30 बजे सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने इस मामले में खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है. इसलिए जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली पीठ बुधवार को इस मामले की सुनवाई करेगी. पीठ के अन्य सदस्य जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना हैं.

फांसी की सजा पाए चारों आरोपियों में से एक अक्षय ठाकुर ने सर्वोच्च अदालत से रहम की गुहार लगाई है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में निर्भया के माता-पिता भी मौजूद रहे. करीब दस मिनट की सुनवाई के बाद ही इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया. दूसरी ओर, निर्भया के दोषियों को एक महीने के भीतर फांसी पर लटकाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई टाल दी गई. इस मामले में संजीव कुमार ने याचिका दाखिल की थी.

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नई पीठ करेगी सुनवाई

अक्षय के वकील ने दावा किया है कि उनके मुवक्किल को सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव में दोषी ठहराया गया है. चीफ जस्टिस ने मामले के दस्तावेजों के माध्यम से जाना कि इस मामले में उनके भतीजे भी पेश हो चुके हैं. उन्होंने इसके बारे में अक्षय के को सूचित किया और उनकी प्रतिक्रिया मांगी. बाद में चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई एक नई पीठ से करवाने का निर्णय लिया.

शीर्ष अदालत ने निर्भया की मां की याचिका को अनुमति दी थी, जो मौत की सजा पर पुनर्विचार का विरोध कर रही है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले मामले के तीन अन्य दोषियों की मृत्युदंड से संबंधित पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था. मामले के तीन अन्य दोषी मुकेश (30), पवन गुप्ता (23) और विनय शर्मा (24) हैं. शीर्ष अदालत ने 2017 में पुनर्विचार करने के लिए कोई आधार नहीं पाया और दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट की ओर से दिए गए मृत्युदंड को बरकरार रखा.

क्या है मामला?

दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर, 2012 की रात करीब नौ बजे अपने दोस्त के साथ एक खाली प्राइवेट बस में चढ़ी 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ छह लोगों ने मिलकर चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया और लोहेकी रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं. छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया. बाद में दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया. पीड़िता का इलाज पहले सफदंरजग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया. जुल्म के 13वें दिन 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई.

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