एमसीडी चुनाव में पुराने पार्षदों का टिकट काटने का ऐलान कर चुकी बीजेपी के लिए नए उम्मीदवार चुनना कठिन साबित हो रहा है. पार्टी ने टिकट की चाहत रखने वाले उम्मीदवारों को सोमवार तक बायोडाटा जमा करवाने को कहा था. लेकिन ज्यादातर नेता बायोडाटा में जनता की सेवा से ज्यादा संघ के साथ रिश्तों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.
संघम शरणम् गच्छामि
दिल्ली का काम देख रहे बीजेपी के पदाधिकारी टिकट के दावेदारों के संघ कनेक्शन के किस्से सुनने को मजबूर हैं. लगभग हर बायोडाटा में आरएसएस से किसी ना किसी तरह जुड़े होने या परिवार के संघ से पुराने नाते का जिक्र किया गया है.
अपने-अपने दावे
बायोडाटा में एक टिकट दावेदार ने लिखा है कि उनके पिता संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और वो खुद भी शाखा में जाया करते थे. एक दूसरे दावेदार का कहना है कि उनके पिता मध्य प्रदेश में संघ से जुड़े रहे और वहां एक जिले में संघ शुरू करने का काम उनके पिता ने ही किया. इसी तरह टिकट के लिए कतार में लगे एक अन्य नेता ने खुद को बचपन से ही संघ से जुड़ा हुआ बताया है.
जनसंघ से भी कनेक्शन!
कुछ दावेदार तो भारतीय जन संघ के जमाने का कनेक्शन जोड़ते दिख रहे हैं. ऐसे नेता आरएसएस और जनसंघ के अलावा विश्व हिंदू परिषद् से भी पुश्तैनी रिश्ते होने का दम भर रहे हैं. बीजेपी के एक सीनियर नेता ने माना कि जबसे मोदी सरकार आई है तब से ज्यादातर लोग खुद का संघ से पुराने रिश्ते खोज-खोजकर निकाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भी जो पहले संघ से अपना नाता छिपाते थे, वो भी अब हर मौके पर खुद को संघ से किसी न किसी तरह जुड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी की दिल्ली इकाई को अभी तक करीब 19 हजार बायोडाटा मिले हैं. इनकी जांच होना बाकी है.