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जबरदस्‍ती बनाया जाता है सेरोगेट मदर, दिल्‍ली-मुंबई में सबसे ज्‍यादा शोषण

किराए पर कोख देकर दूसरे लोगों की जिंदगी में खुशियां भरने वाली महिलाएं खुद शोषण का शिकार हो रही हैं. एनजीओ सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की ओर से कराए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि ज्यादातर महिलाएं अपनी मर्जी से सरोगेट मदर नहीं बनना चाहती, लेकिन पति का दबाव उन्हें अपनी कोख किराए पर देने के लिए मजबूर करता है.

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सरोगेट मदर
सरोगेट मदर

किराए पर कोख देकर दूसरे लोगों की जिंदगी में खुशियां भरने वाली महिलाएं खुद शोषण का शिकार हो रही हैं. एनजीओ सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की ओर से कराए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि ज्यादातर महिलाएं अपनी मर्जी से सरोगेट मदर नहीं बनना चाहती, लेकिन पति का दबाव उन्हें अपनी कोख किराए पर देने के लिए मजबूर करता है.

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च ने वुमेन एंड चाइल्ड मिनिस्ट्री के सहयोग से दिल्ली और मुबंई में करीब 100 सरोगेट मदर्स पर एक सर्वे किया. साल भर चलने वाले इस सर्वे में 50 कमीशन एजेंट से बातचीत के दौरान कई चौकाने वाले खुलासे हुए. मुंबई में 73 फीसदी और दिल्ली में 52 फीसदी महिलाओं का कहना था कि वो पति के दबाव में सरोगेट मदर बनी. मुंबई की 92 फीसदी और दिल्ली की 60 फीसदी महिलाओं को आईवीएफ क्लीनिक के साथ हुए कांट्रेक्ट की जानकारी तक नहीं थी. दिल्ली में 65 फीसदी और मुंबई में 56 फीसदी सेरोगेट मदर को पूरे नौ महीने तक परिवार से दूर शेल्टर होम में रखा गया. इनमें से ज्यादातर मामलों में पाया गया कि महिलाओं को वादे के मुताबिक ना तो सही खान-पान दिया गया और ना ही उनकी सेहत की अच्छी तरह से देखभाल की गई.

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रिपोर्ट में इसका खुलासा भी हुआ कि आईवीएफ क्लीनिक सरोगेसी के लिए 30 से 40 लाख रुपये वसूल रहें है, लेकिन सरोगेट मदर के हिस्से 3 से 4 लाख रुपये आते हैं. इनमें से कई सरोगेट मदर्स ने पूरा भुगतान ना होने की शिकायत भी की. डॉ. रंजना कुमारी, निदेशक, सेंटर फॉ सोशल रिसर्च ने कहा कि पूरी तरह से महिलाओं का शोषण हो रहा है और इसका कमर्शियलाइजेशन खत्म होना चाहिए.

सर्वे इस ओर भी इशारा करता है कि सरोगेसी के दौरान सेक्स डिटरमीनेशन टेस्ट भी हुए. ज्यादातर महिलाओं ने लड़कों को ही जन्म दिया. डॉ रंजना कुमारी ने बताया कि सेरोगेट महिलाओं को यह भी पता था कि उनके गर्भ में लड़का है. सर्वे रिपोर्ट से पता चला कि जिन महिलाओं का पहली बार में गर्भपात हो गया, उन्हें ना तो किसी तरह का भुगतान किया गया और ना ही उनकी दवाइयों, चैकअप पर खर्च किया गया. यही नहीं सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि सरोगेट मदर से बच्चा होने के तुरंत बाद ले लिया जाता है. उन्हें बच्चे को पहले कुछ दिनों तक दूध पिलाने तक की अनुमति नहीं होती. सरेगेट मदर्स के बढ़ते शोषण को दोखते हुए ही सेरोगेसी के लिए कड़े कानून बनाने की मांग हो रही है.

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मुंबई और दिल्ली में सरोगेट मदर्स पर किए सर्वे में खुलासा हुआ है कि सरोगेट मदर्स का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है. संस्थाओं का मानना है कि इसका बड़ा कारण है आईवीएफ और सरोगेसी को कंट्रोल करने के लिए कानून का नहीं होना. सरोगेट मदर्स की मदद के लिए संस्थाओं की राय है कि सरोगसी के लिए महिलाओं की राजामंदी जरूर होनी चाहिए. सर्वे में ज्यादातर महिलाओं ने माना कि दबाव में उनको सेरोगेट मदर बनने को मजबूर किया गाया. सेटंर फॉर सोशल रिसर्च की सदस्‍य डॉ. मानसी ने बताया कि पति को पैसे की जरूरत है, लोन चुकाना है तो पत्‍नी पर दबाव डालते हैं. कोख किराए पर देकर दूसरे के घर आबाद करना नेक काम माना जाता है, लेकिन अगर पैसों के लालच में इसका दुरुपयोग हो तो उसे रोकने की सख्त जरूरत है.

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