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JNU प्रेसीडेंशल डिबेट: नंदीग्राम-सिंगूर से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प तक की चर्चा

12 सितम्बर की रात हुई जेएनयू प्रेसीडेंसियल डिबेट में देश-दुनिया के मुद्दों पर उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी बात रखी. कैम्पस में 14 सितम्बर को वोट डाले जाएंगे और 15 सितम्बर की रात तक नतीजे आ जाएंगे.

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JNU प्रेसीडेंसियल डिबेट के दौरान छात्र
JNU प्रेसीडेंसियल डिबेट के दौरान छात्र

प्रेसीडेंशल डिबेट, जेएनयू छात्र संघ चुनाव का अहम हिस्सा है. वोटिंग से दो दिन पहले इसका आयोजन कैंपस में होता है. इस डिबेट में प्रेसीडेंट पद के लिए खड़े सारे उम्मीदवार बारी-बारी से अपनी बात सामने बैठे छात्र-छात्राओं के सामने रखते हैं.

डिबेट में कैम्पस से जुड़ी बातें तो होती ही हैं लेकिन देश-दुनिया में घट रही घटनाओं पर वक़्ता अपनी राय रखते हैं. हर उम्मीदवार को 12 मिनट का समय दिया जाता है. जब सारे उम्मीदवार बोल लेते हैं तो डिबेट का दूसरा राउंड होता है जिसमें सामने बैठे छात्र, वक्ताओं से सवाल करते हैं. हर उम्मीदवार के लिए 7 सवाल लिए जाते हैं और उन्हें एक सवाल का जवाब देने के लिए लगभग 2 मिनट का समय दिया जाता है.

जेएनयू कैंपस के स्वभाव से परिचित लोग तो यह समझते हैं लेकिन बाहर के लिए लोग कई बार यह समझ नहीं पाते कि किसी छात्र संघ चुनाव में देश और दुनियाभर के मुद्दों पर वक़्ता क्यों बोलते हैं. इसकी वजह है कि जेएनयू के छात्र यह जानना चाहते हैं कि जो उनका अध्यक्ष बन रहा है या बनने की दावेदारी कर रहा है वो कैम्पस के बाहर के मुद्दों और घटनाओं को कैसे देख रहा है. देश-दुनिया में जो कुछ घट रहा है, उस बारे में उम्मीदवार कुछ सोचता भी है या नहीं. अगर सोचता है तो क्या सोचता है?

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यही वजह है कि जेएनयू प्रेसीडेंशल डिबेट में देश दुनियाभर के मुद्दों पर उम्मीदवार अपनी सोच और अपने संगठन की सोच के आधार पर अपनी बात रखते हैं. जेएनयू छात्र संघ चुनाव 2018 के लिए यह डिबेट 12 सितम्बर की रात आयोजित हुई. हमेशा की ही तरह उम्मीदवारों ने दुनियाभर के मुद्दों पर अपनी बात रखी.

बता दें कि यूनाइटेड लेफ्ट (आइसा, डीएसएफ, एसएफआई और एआईएसएफ)  की तरफ से अघ्यक्ष पद के लिए एन साई बाला दावेदार हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ललित पांडे हैं. बिरसा मुंडे फुले अंबेडकर स्टूडेंट्स यूनियन (बापसा) से अध्यक्ष पद के लिए थालापल्ली प्रवीण मैदान में हैं. 'सवर्ण छात्र मोर्चे' से निधि त्रिपाठी और कैंपस में पहली दफा चुनाव लड़ रहे राजद की छात्र संघ इकाई की तरफ से जयंत जिज्ञासु अध्यक्ष पद के दावेदार हैं. तीन उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिन्हें किसी पार्टी का साथ नहीं मिला है और वो निर्दलीय मैदान में हैं.

आइए जानते हैं कि कैम्पस के मुद्दों के अलावा किस उम्मीदवार ने क्या-क्या कहा...

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ललित पांडे जब बोलने आए तो उन्होंने लेफ्ट एकता पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि नंदीग्राम और सिंगूर के दोषी आज एक साथ आ गए हैं.

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वहीं, बापसा उम्मीदवार थालापल्ली प्रवीण ने बाबा साहब अंबेडकर और जोतिबा फुले द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कामों का जिक्र किया. थालापल्ली प्रवीण ने कहा कि इस कैम्पस में कुछ दिन पहले तक 'जय भीम' का नारा नहीं लगता था लेकिन आज लेफ्ट-राइट दोनों 'जय भीम-जय भीम' बोल रहे हैं.

'सवर्ण छात्र मोर्चे' की उम्मीदवार निधि त्रिपाठी ने अपने भाषण में कहा कि हाल के समय में देश में सवर्ण पर जो अत्याचार हो रहे हैं वो चिंतनीय है. उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कोई भी राजनीतिक दल सावर्णों के बारे में बात नहीं करता. यह हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है.

राजद छात्र इकाई की तरफ से ताल ठोक रहे जयंत जिज्ञासु ने नोटबंदी और केरल बाढ़ में विदेशी मदद नहीं लेने के लिए मौजूदा केंद्र सरकार की आलोचना की. जयंत ने महिला आरक्षण में दलित-शोषित महिलाओं के लिए अलग से कोटे की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि वो चाहते हैं, स्मृति ईरानी संसद में आएं लेकिन पत्थर तोड़ने वाली फुलाबतिया देवी भी संसद में पहुंचे. जयंत ने ही अपने भाषण में ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने पर राइट विंग के लोगों के द्वारा खुशी मनाने पर भी तंज किया.

यूनाइटेड लेफ्ट की तरफ से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार एन साई बाला ने अपने भाषण में नोटबंदी का जिक्र किया. एन साई बाला ने कहा कि आरबीआई की हालिया रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि नोटबंदी-कालेधन पर नहीं बल्कि देश के गरीबों पर चोट थी.

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इनके अलावा तीन निर्दलीय भी थे और उन्होंने अपने भाषण में सभी पार्टियों और उनके छात्र इकाइयों बराबर प्रहार किया. बता दें कि कैम्पस में 14 सितम्बर को वोट डाले जाएंगे और 15 सितम्बर की रात तक नतीजे आ जाएंगे.

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