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जेएनयू की सेंट्रल लाइब्रेरी की बेवसाइट हैक, हैकर्स ने कहा- भौंकने से कश्मीर तुम्हारा नहीं होगा

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कुछ छात्रों द्वारा देश विरोधी नारे लगाने पर हैकर्स के एक ग्रुप ने नाराजगी जाहिर की है. इस मामले पर विरोध जताने के लिए हैकर्स ने मंगलवार को यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी की वेबसाइट हैक कर ली. जब यूजर्स ने lib.jnu.ac.in पर लॉग इन करने की कोशिश की, तो उन्हें वहां भारत का झंडा नजर आया, जिसके बैकग्राउंड में 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना चल रहा था.

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हैकर्स ने इस तरह जताई नाराजगी हैकर्स ने इस तरह जताई नाराजगी

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कुछ छात्रों द्वारा देश विरोधी नारे लगाने पर हैकर्स के एक ग्रुप ने नाराजगी जाहिर की है. इस मामले पर विरोध जताने के लिए हैकर्स ने मंगलवार को यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी की वेबसाइट हैक कर ली. जब यूजर्स ने lib.jnu.ac.in पर लॉग इन करने की कोशिश की, तो उन्हें वहां भारत का झंडा नजर आया, जिसके बैकग्राउंड में 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना चल रहा था.

नारों पर नाराजगी
ब्लैक ड्रैगन नाम के ग्रुप ने इस वेबसाइट को हैक करने का दावा किया है. साथ ही उन्होंने संदेश छोड़ा है, 'जैसा कि तुमने कहा कि "कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी-जंग रहेगी ." तुम्हें लगता है कि जेएनयू के कैंपस के अंदर भौंकने भर से कश्मीर तुम्हें मिल जाएगा.'

बेवसाइट ठीक करने की कोशिश
लाइब्रेरी प्राधिकारी ने बताया, 'ऑफिस खत्म होने के बाद वेबसाइट की हैकिंग पर ध्यान गया. इस मामले की जानकारी यूनिवर्सिटी के आईटी विभाग को दे दी गई है और वो उसे ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'हालांकि अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है.'

देशद्रोह पर बढ़ता विवाद
हैकर्स ने जिस नारे का जिक्र किया है, वो 9 फरवरी को यूनवर्सिटी कैंपस में हुए एक कार्यक्रम में छात्रों ने लगाया था. संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने जमकर देश विरोधी नारे लगाए थे. देशद्रोह के मामले में यूनिवर्सिटी की छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया गया है. इसके बाद से सरकार गैर-बीजेपी पार्टियों के निशाने पर आ गई है.

यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी की बेवसाइट पर 72 ऑनलाइन डाटाबेस, लाइब्रेरी कैटलॉग, 20,000 इलेक्ट्रॉनिक थीसीज एवं डिसर्टेशन, 8 लाख डिजिटल प्रेस क्लिपिंग, 100 देशों से 57 भाषाओं में 2,300 ई-न्यूजपेपर, करीब 2 लाख ई-बुक्स के अलाबा सभी ई-जर्नल उपलब्ध हैं.

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