जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) हिंसा के दौरान घायल फैकल्टी मेंबर सुचरिता सेन ने मंगलवार को इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत की. कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए सुचरिता सेन ने दावा किया कि हमले में कोई भी छात्र शामिल नहीं था. उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र ने हमला नहीं किया होगा, वे बाहरी थे. इस मामले में वाइस चांसलर को इस्तीफा देना चाहिए. सेन ने कहा, अगर मैं आज जिंदा हूं तो केवल अपने भाग्य की वजह से. हिंसा के लिए जेएनयू प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के सर्वर रूम में तोड़फोड़ करने के लिए जेएनयूएसयू अध्यक्ष और 19 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. टीवी पर रविवार शाम खून से सने चेहरे और सोमवार को पट्टी बांधे नजर आईं घोष पर अब जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगा है.
उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 341, 323 और 506 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति रोकथाम अधिनियम, 1984 की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. उनके अलावा एफआईआर में साकेत मून, सतीश यादव, सारिका चौधरी और अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं.
हिंसा के कुछ देर बाद ही दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आइशी घोष के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं. आइशी पर गार्ड के साथ मारपीट और सर्वर रूम में तोड़फोड़ के मामले दर्ज किए गए. ये दोनों ही घटनाएं कैंपस में तोड़फोड़ और मारपीट से दो दिन पहले की थीं.
प्रशासन ने 3 जनवरी और 4 जनवरी को पुलिस स्टेशन को दो शिकायतें दी थीं. इनमें जबरन सर्वर रूम में घुसने और सुरक्षाकर्मियों को उनकी ड्यूटी से रोकने और बदसलूकी का आरोप लगाया था. इसी शिकायत के आधार पर आइशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. दोनों एफआईआर महज 5 मिनट के अंदर दर्ज की गईं.