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UN की रिपोर्ट से खुलासा, मानव तस्करी का बड़ा बाजार बन गया है भारत, दिल्ली है पसंदीदा अड्डा

युनाइटेड नेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके मुताबिक भारत मानव तस्करी का बड़ा बाजार बन चुका है और देश की राजधानी दिल्ली मानव तस्करों की पसंदीदा जगह बनती जा रही है.

भारत में चाइल्ड और वुमन राइट्स को बड़ा झटका देते हुए युनाइटेड नेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके मुताबिक भारत मानव तस्करी का बड़ा बाजार बन चुका है और देश की राजधानी दिल्ली मानव तस्करों की पसंदीदा जगह बनती जा रही है, जहां देश भर से बच्चों और महिलाओं को लाकर ना केवल आसपास के इलाकों बल्कि विदेशों में भी भेजा जा रहा है.

अपनी संस्कृति के लिए दुनियाभर में मशहूर भारत तेजी से मानव तस्करी के लिए बदनाम हो रहा है. भारत में मानव तस्करी को लेकर यूएन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साल 2009 से 2011 के बीच लगभग 1,77,660 बच्चे लापता हुए जिनमें से 1,22,190 बच्चों को पता चल सका, जबकि अभी भी 55 हजार से ज्यादा बच्चे लापता हैं जिसमें से 64 फीसदी यानी लगभग 35,615 नाबालिग लड़कियां हैं. वहीं इस बीच करीब 1 लाख 60 हजार महिलाएं लापता हुई जिनमें से सिर्फ 1 लाख 3 हजार महिलाओं का ही पता चल सका. वहीं लगभग 56 हजार महिलाएं अब तक लापता हैं (सभी आंकड़े एनसीआरबी की गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट से लिए गए हैं). मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों के मुताबिक कानून का लचर रवैया मानव तस्करी को रोक पाने में असफल है.
 
शक्तिवाहिनी के निदेशक रविकांत का कहना है कि कानून में तमाम तरह की धाराएं दी गई हैं. लेकिन पुलिस को कुछ पता ही नहीं होता है. कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए.

दिल्ली बनी पसंदीदा जगह
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एक ट्रांसिट प्वाइंट के तौर पर मानव तस्करों के लिए पसंदीदा जगह बनती जा रही है जहां देश के कई हिस्सों से लाकर बच्चों और महिलाओं को दूसरी जगहों पर भेजा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011-12 में एनजीओ की मदद से 1532 बच्चों को रेस्क्यू किया गया. वहीं दिल्ली से लापता बच्चों की बात करें तो साल 2009-2011 के बीच लापता हुए लगभग 3,094 बच्चों का अबतक कोई सुराग नहीं लग पाया है जिनमें से 1,636 लड़कियां हैं तो वहीं इस दौरान गायब हुईं लगभग 3,786 महिलाएं भी अबतक लापता हैं (सभी आंकड़े एनसीआरबी की गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट से लिए गए हैं). रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में तस्करी कर लाए गए बच्चों और महिलाओं की मांग खूब है.

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