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बीजेपी ने कैसे फतह किया नई दिल्ली सीट का किला? केजरीवाल पर भारी पड़े प्रवेश वर्मा

बीजेपी ने रणनीति के तहत बेहतर बूथ मैनजमेंट किया और वोटरों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाई. इसी पर काम करते हुए त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी को करीब 60 प्रतिशत बूथों पर बढ़त मिली और प्रवेश वर्मा की जीत सुनिश्चित हुई.

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बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट आया काम
बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट आया काम

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार किसी के लिए चौंकने वाली बात नहीं थी, लेकिन अरविंद केजरीवाल का उनकी ही घरेलू सीट पर हारना जरूर हैरान करता है. पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लगातार तीन बार नई दिल्ली विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी तो आखिर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ये करिश्मा कैसे कर दिखाया? बूथ दर बूथ वोटर्स के डेटा का विश्लेषण करने पर इस सवाल का जवाब मिल जाएगा.

नई दिल्ली सीट की सियासी जंग

नई दिल्ली विधानसभा सीट पर इस महामुकाबले में तीनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने दिग्गज उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया था. बीजेपी ने दो बार के सांसद प्रवेश वर्मा को मैदान में उतारा. कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को टिकट दिया और AAP की तरफ से खुद पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल मैदान में थे, जो 2013 से लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके थे.

प्रवेश वर्मा को 76 बूथों पर बढ़त 

पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल सीट के ज्यादातर मतदान केंद्रों पर प्रवेश वर्मा से पीछे रहे. 123 मतदान केंद्रों और दो सहायक बूथों में से केजरीवाल को 49 पर बढ़त मिली, जबकि प्रवेश वर्मा ने 76 बूथों पर ज्यादा वोट हासिल किए, जिससे उन्हें चुनाव जीतने में मदद मिली. वोटों के अंतर की गिनती हर बूथ पर प्रवेश वर्मा और केजरीवाल के वोटों को घटाकर की गई. 39 बूथों में यानी लगभग 30 प्रतिशत सेंटर्स पर दोनों उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर 20 से कम था. जिससे कड़ी टक्कर देखने को मिलती है. हालांकि, कुछ क्षेत्रों में केजरीवाल को ज्यादा समर्थन मिला, लेकिन प्रवेश वर्मा की मजबूत बढ़त ने उनकी जीत सुनिश्चित की. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार केजरीवाल को 25,865 वोट मिले, जबकि प्रवेश वर्मा को 29,878 वोट मिले. पोस्टल बैलेट में केजरीवाल को 134 और प्रवेश वर्मा को 210 वोट मिले.

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बीजेपी ने कैसे हासिल की जीत?

बीजेपी ने सरल रणनीति के तहत बेहतर बूथ मैनजमेंट किया और वोटरों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाई. इसी पर काम करते हुए त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी को करीब 60 प्रतिशत बूथों पर बढ़त मिली. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत प्लान बनाया क्योंकि बीजेपी यह जानती थी कि आम आदमी पार्टी अपने राष्ट्रीय संयोजक को जिताने के लिए चुनाव में पूरी ताकत झोंक देगी.

ये भी पढ़ें: दिल्ली का चुनाव टीम मोदी की रणनीति की 'मास्टरक्लास' है... ऐसे मिली जीत

बीजेपी ने उन बूथों पर फोकस किया जहां जीत संभव थी और कई राज्यों के वरिष्ठ नेताओं को प्रचार के लिए उतारा. पार्टी जानती थी कि अगर यह सिर्फ उम्मीदवार बनाम उम्मीदवार की लड़ाई बनती तो केजरीवाल को जीतने का बेहतर मौका मिलता. इसी वजह से बीजेपी ने चुपचाप अपनी रणनीति को लागू किया. इसका नतीजा यह हुआ कि प्रवेश वर्मा को कुल 50 फीसदी से कम वोट मिले, लेकिन उन्होंने 60 प्रतिशत बूथों पर बढ़त हासिल की. इसका मतलब यह था कि उन्होंने ज्यादा बूथों को टारगेट किया, भले ही यहां बीजेपी की बढ़त बहुत ज्यादा नहीं रही.
 

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