कहते हैं उम्मीदों पर दुनिया कायम है. उम्मीद की इसी डोर को पकड़ कर अमरिक सिंह दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट में अपने बीमार दिल के साथ पहुंचे. 74 साल के अमरिक सीवियर हॉर्ट अटैक का शिकार हो चुके थे. उनको कई बड़े अस्पतालों ने जबाव दे दिया था.
अब फोर्टिस के डॉक्टरों के पास चुनौती ना सिर्फ एन्युरिज्म को ठीक करना था, बल्कि अमरिक को सही सलामत रखने के लिए एक छोटा सा डिवाइस दिल के साथ फिट भी करना था. उम्र ज्यादा होने के वजह से उनका केस काफी जटिल था.
फोर्टिस एस्कॉर्ट के डायरेक्टर डॉ. विशाल रस्तोगी ने बताया कि अमरिक के दिल कि बिगड़ती हालात की वजह से उसे वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा. वह हार्ट ट्रांस्प्लांट के केस में भी कानूनन फिट नहीं हो रहे थे. 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों में हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता.
बताते चलें कि देश में ऑर्गन डोनेशन की कमी की वजह से अधिक उम्र के लोगों की अपेक्षा कम उम्र के लोगों को तवज्जो दी जाती है. इस तरह से अमरिक के पास लेफ्ट वेन्ट्रिकल असिस्टिंग डिवाइस इम्प्लांट कराने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था.
फोर्टिस की टीम ने 4 जून को एन्युरिज्म को ठीक करने और एलवीएडी इम्प्लांट करने के लिए अमरिक की दोहरी सर्जरी की. करीब 7 घंटे की सर्जरी के बाद उनका दिल बैटरी के सहारे धड़कने लगा. 4 हफ्तों में ही उनकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ. अब वह पूरी तरह ठीक हैं.