scorecardresearch
 

शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद के भाषणों का पैटर्न एक: दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद भाषण में जब बाबरी मस्जिद या तीन तलाक के बारे में बात करते हैं तो एक धर्म से संबंधित होते हैं. लेकिन कश्मीर के बारे में बात करते हैं तो यह धर्म का मुद्दा न होते हुए राष्ट्रीय एकता का मुद्दा बना जाता है. CAA-NRC के भाषणों के जरिये मुलसमानों में डर पैदा किया गया.

X
उमर खालिद ( फाइल फोटो )
उमर खालिद ( फाइल फोटो )
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली पुलिस कहा- उमर खालिद के भाषणों का पैटर्न एक
  • दिल्ली दंगा मामले में हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

दिल्ली हिंसा मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई की गई. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद के भाषणों पर अपना पक्ष रखा. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि CAA और NRC पर उमर खालिद के भाषणों के जरिए मुस्लिमों में डर पैदा करना था.

दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि भाषण का पर्चा शरजील इमाम ने लिखा था. पर्चे से यह बात निकलकर सामने आई है कि उनकी शिकायत CAA-NRC से नहीं थी. लेकिन CAA-NRC के भाषणों के जरिये मुलसमानों में डर पैदा किया गया.

धर्म नहीं राष्ट्रीय एकता का मुद्दा

पुलिस ने कोर्ट में कहा शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद के भाषण में जब बाबरी मस्जिद या तीन तलाक के बारे में बात करते हैं तो एक धर्म से संबंधित होते हैं. तीनों के भाषण में एक ही पैटर्न देखने को मिलता है. लेकिन कश्मीर के बारे में बात करते हैं तो यह धर्म का मुद्दा नहीं न होते हुए राष्ट्रीय एकता का मुद्दा बना जाता है. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि लोगों  को उकसाने का काम स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि जेएनयू और दूसरे स्थानों से किया गया.

व्हाट्सएप ग्रुप किए गए डिलीट

कोर्ट में पुलिस ने कहा - दंगों के षड्यंत्र को लेकर जैसे ही पहला मामला दर्ज हुआ वैसे ही सभी व्हाट्सएप ग्रुप डिलीट किए गए और ग्रुप में शामिल लीग दूसरे मैसेजिंग ऐप सिग्नल ( Signal ) का उपयोग करने लगी. राहुल राय ने चार लोगों को ग्रुप से निकाला इनमें दो लोग ऐसे थे जो हिंसा के समय वहीं मौजूद थे. जिस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या राहुल राय मामले में आरोपी है या ग्रुप में मैसेज भेजने वाले मामले में आरोपी है. जबाव में पुलिस ने बताया राहुल राय आरोपी नहीं है. लेकिन ग्रुप के कई सदस्य आरोपी हैं.

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में जाफराबाद मौजपुर इलाके और वजीराबाद रोड का नक्शा कोर्ट को दिखाया और कहा कि इनका इरादा पूरे इलाके को ब्लॉक करने का था. साल 2019 और 2020 में जो हिंसा हुई, दोनों ही चरणों की हिंसा में शामिल लोग एक ही थे. पहले चरण की हिंसा की विफलता के बाद दूसरे चरण की हिंसा की तैयारी शुरु हुई लेकिन पैटर्न एक ही था.

दिल्ली पुलिस ने कहा, अफवाहों के आधार पर विरोध और सड़कों पर रणनीतिक रूप से हिंसा करने की तैयारी की गई थी और पुलिस-अर्धसैनिक बलों के बीच तनाव की स्तिथि पैदा की गई.

SOJ की और से बांटे गए थे पर्चे 

पुलिस ने बताया, चार दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार ने CAA को मंजूरी दी उसके अगले दिन व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया. इस ग्रुप में शरजील इमाम एक्टिव मेंबर था. वहीं स्टूडेंट्स ऑफ जामिया (SOJ) की तरफ से पर्च बांटे गए. ऐसे लोगों का एसोसिएशन बनाने की बात कही जो धर्म निरपेक्षता, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद के खिलाफ हो.

 

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें