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GST: विरोध में दिल्ली में कपड़ों के थोक बाज़ार रहे बंद, रिटेल बाज़ारों पर नहीं दिखा असर

दिल्ली के आधा दर्जन से ऊपर कपड़े के होलसेल के मार्किट शुक्रवार को जीएसटी के विरोध मे व्यापारियों ने बंद रखे. व्यापारियों का कहना है कि सरकार का ये क़दम न सिर्फ उनकी सरदर्दी बढ़ाएगा, बल्कि इस टैक्स से उनके व्यवसाय मे भी 5 से 20 प्रतिशत की मंदी आएगी.

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बाजार रहे बंद
बाजार रहे बंद

दिल्ली के आधा दर्जन से ऊपर कपड़े के होलसेल के मार्किट शुक्रवार को जीएसटी के विरोध मे व्यापारियों ने बंद रखे. व्यापारियों का कहना है कि सरकार का ये क़दम न सिर्फ उनकी सरदर्दी बढ़ाएगा, बल्कि इस टैक्स से उनके व्यवसाय मे भी 5 से 20 प्रतिशत की मंदी आएगी. व्यापारी इस बात से भी नाराज है कि क्लॉथ मैटेरियल जिस पर आज़ादी से अब तक कभी टैक्स नही लगा, सरकार ने उस पर भी 5 फ़ीसदी का टैक्स लगा दिया है.

इसके अलावा हज़ार रुपये से ऊपर के सिले हुए कपड़ों पर भी अब 5 की बजाय 12 फ़ीसदी का टैक्स लगेगा. अमर कॉलोनी के कपड़े के होलसेल व्यापारियों का कहना है कि जितना फीसदी टैक्स सरकार बढ़ा कर लगा रही है, उतना ही फ़ीसदी उन्हें व्यवसाय मे आने वाले वक़्त मे घाटे का डर सता रहा है. पिछले 2 सालों मे मंदी से पहले ही कपड़ा व्यापारी घाटे में हैं. .

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लेकिन एक तरफ राजधानी में जहां होलसेल मार्केट बंद दिखे, वहीं दूसरी तरफ रिटेल के बाजारों पर इसका कोई असर नही दिखा. दिल्ली के सबसे पॉपुलर मार्केट में से एक सरोजिनी नगर में सभी दुकानें आम दिनों की तरह ही खुली दिखीं और बाजार में ख़रीदार बारिश के बावजूद शॉपिंग करते नज़र आए. हालांकि जीएसटी के लागू होने से रिटेल मार्केट मे भी ज़्यादातर दुकानदार नाखुश दिखे. उनका कहना है कि न सिर्फ उन्हें अब एक सीए रखना होगा, बल्कि हर हाल मे कंप्यूटर और बाकी के जुड़े खर्चे 50 हज़ार से ऊपर के हर महीने खर्चे उठाने होंगे. .

इसके अलावा टैक्स की दर बढ़ने से कपड़े के व्यापारियों को ये भी डर है कि कहीं उनकी सेल और प्रॉफिट घटकर और कम न हो जाए. बरहाल आशकाएं चाहे जितनी हो, सच ये है कि जीएसटी 1 जुलाई से पूरे भारत मे लागू होने जा रहा है और इससे सरकार, व्यापारी और जनता किसको फ़ायदा हुआ, ये कुछ महीनों के बाद ही साफ़ हो पायेगा. .

 

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