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दिल्ली में सरकार गठन पर 'एक्ट‍िव मोड' में आई BJP, पर LG के न्योते का इंतजार

दिल्ली में नई सरकार को लेकर सुगबुगाहट तेज है. दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता भेजने का जो प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा था उस पर गृहमंत्रालय ने सहमति जताई है. लेकिन फिलहाल बीजेपी के लिए 70 सीटों की विधानसभा में बहुमत साबित कर पाना दूर की कौड़ी नजर आती है.

दिल्ली में नई सरकार की सुगबुगाहट दिल्ली में नई सरकार की सुगबुगाहट

दिल्ली में नई सरकार को लेकर सुगबुगाहट तेज है. दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता भेजने का जो प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा था उस पर गृहमंत्रालय ने सहमति जताई है. लेकिन फिलहाल बीजेपी के लिए 70 सीटों की विधानसभा में बहुमत साबित कर पाना दूर की कौड़ी नजर आती है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय जल्द ही एलजी नजीब जंग के प्रस्ताव पर अपनी राय राष्ट्रपति के पास भेज देगा. जिसके बाद ही दिल्ली में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू हो जाएगी.

अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो जगदीश मुखी दिल्ली के नए सीएम हो सकते हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी को ये घटनाक्रम रास नहीं आ रहा. आम आदमी पार्टी के नेता बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने से रोकने के लिए शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से गुहार करेंगे.

बीजेपी को सरकार बनाने का मौका ना दिए जाने के पीछे आम आदमी पार्टी का बड़ा तर्क ये है कि पिछले साल दिल्ली चुनाव के नतीजे के बाद जब किसी दल को बहुमत नहीं मिला था. तब सबसे बड़ी पार्टी के बावजूद तत्कालीन दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्षवर्धन ने उपराज्यपाल नजीब जंग को चिट्ठी लिखी थी और बहुमत ना मिलने का हवाला देकर सरकार बनाने में असमर्थता जताई थी. आम आदमी पार्टी का कहना है कि अगर दिल्ली में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता मिलता है तो इससे विधायकों की खरीद फरोख्त को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में आम आदमी पार्टी दिल्ली में बीजेपी सरकार बनवाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी.

बीजेपी के लिए मुश्किल है बहुमत हासिल करना
बीजेपी 31 विधायकों में से 3 सांसद बन चुके हैं. ऐसे में 70 सीटों वाली विधानसभा की ताकत घटकर 67 हो गई है. यानी 34 होगा बहुमत का आंकड़ा. शिरोमणी अकाली दल के 1 विधायक को मिलाकर बीजेपी के पास 29 विधायक हैं.
- अगर आम आदमी पार्टी व्हिप जारी कर देती है तो बीजेपी के पक्ष में वोट करने वाले इसके विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाएगी. हालांकि दो तिहाई सदस्य (18) ने बीजेपी के लिए वोट डाला तो सदस्यता रद्द नहीं होगी.
- इसी तरह कांग्रेस के 8 में से 6 विधायकों को बीजेपी के पक्ष में वोट डालना होगा. यह संभव होता नहीं दिख रहा.
-अगर आप और कांग्रेस के कुछ विधायक बीमार पड़ जाएं व वोटिंग में हिस्सा नहीं लें तो बात बन सकती है.

क्या गोपनीय मतदान से दिल्ली में बनेगी सरकार?
चूंकि दिल्ली में कोई दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. दलबदल कानून की वजह से कोई विधायक पार्टी लाइन से अलग जाकर दूसरे दल का समर्थन करने जोखिम नहीं उठा सकता लिहाजा गुप्त मतदान सरकार बनाने का बेहतर विकल्प माना जा रहा है. इसके लिए उपराज्यपाल नजीब जंग को अपने विशेष अधिकार का उपयोग करना होगा जो उन्हें दिल्ली एनसीटी एक्ट के जरिये संसद से मिला है. इस अधिकार के तहत उपराज्यपाल विधान सभा का विशेष सत्र एक सूत्री एजेंडे के लिए बुला सकते हैं. वो सदन को संबोधित कर सकते हैं. वो विधानसभा को गुप्त मतदान के जरिए अपना नेता चुनने का आदेश दे सकते हैं. सदन की सहमति हो तो उपराज्यपाल के आदेश पर स्पीकर को गुप्त मतदान कराना पड़ेगा.

एनसीटी एक्ट के मुताबिक राजनीतिक पार्टियां अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने का व्हिप जारी कर सकती हैं. लेकिन गुप्त मतदान की सूरत में व्हिप का फायदा सियासी पार्टियों को मिल पायेगा इसमें शक है.

इस पूरे सियासी खेल का एक दिलचस्प पहलू ये है कि कम सीटों के बावजूद बीजेपी गुप्त मतदान के लिए तैयार बताई जाती है. लेकिन अपने विधायक धीर सिंह के विधानसभा अध्यक्ष होने के बावजूद आम आदमी पार्टी कदम खींच रही है.

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले सियासी भागदौड़
राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा भी खासी तूल पकड़ रही है कि ये सारा ड्रामा सुप्रीम कोर्ट में नौ सितंबर को होने वाली सुनवाई के लिए ही हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार चाहती है कि दिल्ली में सरकार बने या ना बने, लेकिन अपनी भागदौड़ के बारे में सुप्रीम कोर्ट में जोरदार जवाब दे दिया जाए. एक बार ये काम हो जाए तो फिर दिसंबर जनवरी तक चुनाव कराने की सोचेंगे. तब तक हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजे भी आ जाएंगे और हवा का रुख पता चल जाएगा. इसी बीच नवंबर में दिल्ली विधानसभा की खाली पड़ी तीन सीटों पर उपचुनाव भी हो जाएंगे. यानी लिटमस टेस्ट के कई मौके सामने हैं.

विधानसभा की मौजूदा स्थिति
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 28 विधायक हैं. बीजेपी ने 31 सीटें जीती थीं पर पार्टी के तीन विधायक डॉ. हषर्वर्धन, रमेश बिधुड़ी और प्रवेश वर्मा लोकसभा के लिए चुने गए और उन्हें अपनी विधानसभा सीटें छोड़नी पड़ी थीं. आम आदमी पार्टी को विधानसभा के अपने पहले चुनावों में ही 28 सीटें हासिल हुई थीं और उसने कांग्रेस के आठ विधायकों के बाहरी समर्थन से दिल्ली में सरकार बना ली थी.

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