दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की आत्मकथा आ रही है. इसका नाम होगा, 'सिटीजन डेल्ही: माइ टाइम्स, माइ लाइफ'. प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने गुरुवार को यह घोषणा की. यह देखना दिलचस्प होगा कि अपने कार्यकाल के कॉमनवेल्थ घोटाले और कांग्रेस के विरोधी खेमे द्वारा अपने खिलाफ की जारी तमाम लॉबिइंग के बारे में वह इस आत्मकथा में कुछ कहती हैं या नहीं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शीला दीक्षित की इस आत्मकथा का लोकार्पण 27 जनवरी को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में किया जाएगा. प्रकाशक के अनुसार इसके द्वारा पाठकों को 'भारत के पुरुष प्रभुत्व वाली राजनीतिक जमात में जगह बनाने वाली एक महिला राजनीतिक जीवन यात्रा के बारे में जानने को मिलेगा.'
शीला दीक्षित ने इस बारे में बताया, 'जब मैं अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखती हूं, तो यह पाती हुं कि एक भारतीय महिला अपने जीवन के निर्णय और उसके लिए जवाबदेही खुद ले रही है, जिसे आज के जमाने में भी आधुनिक रवैया माना जा सकता है.'
इस किताब में बताया गया है कि किस प्रकार दिल्ली के लुटियन जोन में साइकिल चलाना पसंद करने वाली एक लड़की ने पांच दशक बाद इसी दिल्ली पर मुख्यमंत्री के रूप में शासन किया और उसमें बदलाव लाया. सिर्फ एक बार नहीं बल्कि 1998 से 2003 के बीच लगातार तीन बार. शीला दीक्षित ने अपने चुनावी राजनीति की शुरुआत साल 1984 में कांग्रेस में शामिल होकर की और वह यूपी के कन्नौज संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव जीत गई थीं.
बताया जाता है कि शीला दीक्षित राजनीति में नहीं आना चाहती थीं. उनका जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ और वे काफी उदारवादी माहौल में पली-बढ़ी थीं. उनकी शादी प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और नेता उमाशंकर दीक्षित के आईएएस बेटे से हुई. उमाशंकर नेहरू-गांधी परिवार के काफी करीबी थे. इस तरह उन्हें अपने ससुराल से ही राजनीति माहौल मिला.