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जंतर-मंतर पर आज से चलेगी 'किसान संसद', आखिर क्यों फंसा था किसानों और पुलिस के बीच पेंच?

आजतक ने खासतौर पर युद्धवीर सिंह से यह बात जानी कि आखिरकार पेंच कहां फंसा था और जब मामला सुलझा तो किन बातों पर सहमति बनी है. युद्धवीर सिंह ने बातचीत में यह भी बताया कि जो चिंता दिल्ली पुलिस की थी वही चिंता कमोबेश किसान संगठनों की भी थी.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हर रोज 11 से 5 बजे तक चलेगी किसान संसद
  • सीसीटीवी कैमरे की भी होगी नजर
  • 40 संगठनों के 5-5 किसान संसद में हर रोज शामिल होंगे

कई दिनों से दिल्ली पुलिस के साथ बातचीत के बाद बुधवार को आखिरकार किसानों के प्रदर्शन को हरी झंडी दे दी गई. दरअसल कई सारे मसले ऐसे थे जिन पर दिल्ली पुलिस काफी संभल कर चल रही थी. जिनमें सबसे बड़ी चिंता यह थी कि जिस तरह से अनुमति मिलने के बाद 26 जनवरी को किसान बेकाबू हुए थे, क्या वही परिस्थिति दोबारा फिर से बन सकती है.

यही वजह थी कि किसानों के यह बार-बार कहने पर भी कि वह शांतिपूर्वक तरीके से अपना प्रदर्शन करना चाहते हैं, दिल्ली पुलिस उन्हें परमिशन देने से हिचकती रही. लेकिन आखिरकार बुधवार को यानी प्रदर्शन शुरू होने से 1 दिन पहले बात बन गई. किसानों की तरफ से पूरी बातचीत का प्रतिनिधित्व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह ने किया.

आजतक ने खासतौर पर युद्धवीर सिंह से यह बात जानी कि आखिरकार पेंच कहां फंसा था और जब मामला सुलझा तो किन बातों पर सहमति बनी है. युद्धवीर सिंह ने बातचीत में यह भी बताया कि जो चिंता दिल्ली पुलिस की थी, वही चिंता कमोबेश किसान संगठनों की भी थी कि कोई असामाजिक तत्व इस पूरे प्रदर्शन के दौरान अंदर घुसकर कोई ऐसी कार्रवाई ना करें जिससे आंदोलन बदनाम हो जाए.

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किन-किन बातों पर बनी सहमति

- हर रोज 11 बजे से लेकर 5 बजे तक चलेगी किसान संसद
- हर संगठन से पांच पांच सदस्य ही शामिल होंगे जिनकी पहचान पहले से चिन्हित की जाएगी
- राजधानी दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन से किसान सुबह 8 बजे सिंघु बॉर्डर के लिए चलेंगे
- सिंघु बॉर्डर पर इकट्ठा होकर किसान एक साथ लगभग 5 बसों में भरकर जंतर मंतर की तरफ 10 बजे रवाना होंगे
- सिंघु बॉर्डर के अलावा किसी भी बॉर्डर से किसानों का कोई भी मोर्चा जंतर मंतर की ओर नहीं जाएगा
- इन बसों में यह 200 किसान जाएंगे उनके साथ-साथ पुलिस की गाड़ी भी चलेगी ताकि बीच में कोई भी गड़बड़ी ना हो
- जंतर मंतर पर भी बैठने की जगह सुनिश्चित की जाएगी और उन्हीं जगहों पर कोविड नियमों का पालन करते हुए सुबह 11 बजे से लेकर शाम के 5 बजे तक किसान संसद चलेगी
- जंतर मंतर पर सुरक्षा के सभी इंतजाम किए जाएंगे और सीसीटीवी कैमरे की भी नजर होगी ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति वहां प्रदर्शन में शामिल ना हो पाए
- किसान संसद में मंच भी संचालित होगा और उन्हीं किसानों में से लगातार मंच से संबोधन भी किया जाएगा
- 5 बजे शाम के बाद फिर से उन्हीं बसों में भरकर किसान दोबारा सिंघु बॉर्डर पहुंचा दिए जाएंगे
- आते वक्त भी पुलिस की कड़ी पहरेदारी बसों के आसपास बनी रहेगी ताकि कोई भी गड़बड़ी ना हो पाए
- लगभग 40 संगठनों के 5-5 किसान संसद में हर रोज शामिल होंगे और उन्हीं 5 किसानों में से एक को मॉनिटर बनाया जाएगा और किसी भी गड़बड़ी की परिस्थिति में उसे जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी. दरअसल दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों को चिंता इसी बात की थी कि जंतर-मंतर के बहाने कोई गड़बड़ी ना हो तभी सभी शामिल होने वाले किसानों पर कड़ी पहरेदारी रखी जाएगी.

 

 

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