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कृषि कानून वापस, केजरीवाल बोले- इतिहास में 15 अगस्त, 26 जनवरी की तरह लिखा जाएगा आज का दिन

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज सिर्फ किसानों की जीत नहीं हुई है. आज जनतंत्र की जीत हुई है. आज किसानों ने सभी सरकारों को बता दिया कि जनतंत्र में हमेशा जनता की बात सुननी होती है.

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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटोः आजतक) अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटोः आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अरविंद केजरीवाल ने बताया जनतंत्र की जीत
  • कहा- आजादी के दीवानों की तरह लड़े किसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 9 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया. पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद इस मसले पर सियासत भी तेज हो गई. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने एक के बाद एक ट्वीट कर पीएम के इस फैसले की तारीफ की. वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर हमलावर रुख अपनाया.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे भारत के इतिहास का सुनहरा दिन बताया. उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह लिखा जाएगा. आज केंद्र सरकार को किसानों के संघर्ष के आगे झुकना पड़ा और तीनों काले कानून वापस लेने पड़े.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज सिर्फ किसानों की जीत नहीं हुई है. आज जनतंत्र की जीत हुई है. उन्होंने कहा है कि आज किसानों ने सभी सरकारों को बता दिया कि जनतंत्र में हमेशा जनता की बात सुननी होती है. कोई भी पार्टी हो, कोई भी नेता हो, जनता के सामने आपका अहंकार नहीं चलेगा. केजरीवाल ने कहा कि इस लड़ाई ने पूरे देश को एक कर दिया. इस लड़ाई में सब ने हिस्सा लिया. पूरा देश धर्म और जाति से ऊपर उठकर किसानों के साथ खड़ा था जिन्होंने सड़क पर तीनों काले कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. आखिर में केंद्र सरकार को उनके आगे झुकना पड़ा.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पूरी दुनिया के इतिहास में शायद ही इससे बड़ा या लंबा कोई आंदोलन हुआ हो. इतने शांतिपूर्ण तरीके से लाखों लोगों ने संघर्ष किया. ठंड, धूप, बरसात में कोई पीछे नहीं हटा. उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए सरकार ने, सिस्टम ने, सभी एजेंसियों ने जानें क्या-क्या कोशिश की. किसानों को आतंकी, खालिस्तानी, देश विरोधी कहा गया. हर तरीके से किसानों को घेरकर उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की गई. लेकिन किसानों ने आजादी के दीवानों की तरह लड़ाई लड़ी और जीते.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि किसानों के प्रबल साहस के सामने वाटर कैनन का पानी सूख गया, लाठी टूट गई, कील गल गई लेकिन सरकार किसानों का जज्बा नहीं तोड़ पाई. आज एक बात का दुख है कि 700 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान गंवा दी. इनकी जान बचाई जा सकती थी अगर ये कानून पहले ही वापस ले लिया गया होता. इन शहीदों को मेरा नमन. इनकी आत्मा की शांति के लिए वाहेगुरु से प्रार्थना करता हूं. आप की कुर्बानियों को ये देश कभी नहीं भूलेगा. आज का दिन हमारे देश के बच्चों और नौजवानों के लिए एक सीख दे रहा है कि अगर सही से शांतिपूर्वक तरीके से संघर्ष करो तो मंजिल कितनी भी कठिन और दूर हो, सफलता जरूर मिलती है.

 

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