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नोटबंदी से काम मंदा होने के चलते दिल्ली के कारोबारी ने 15 कर्मचारियों को निकाला

आनंद पर्वत इंडस्ट्रियल इलाके के कारोबारी प्रदीप सिंह ने नोटबंदी के बाद से काम मंदा होने के चलते 15 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

नोटबंदी का आज 45वां दिन है. इस दौरान कैश की किल्लत से तो हर कोई जूझ रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए है. क्योंकि ये ऐसे लोग है. रोज़ कमाने- खाने वाले इन लोगों का काम इन 45 दिनों से बिल्कुल ठप है. इस बीच आनंद पर्वत इंडस्ट्रियल इलाके के कारोबारी प्रदीप सिंह ने काम मंदा होने के चलते 15 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है.

प्रदीप सिंह बताते हैं कि उनका काम बिल्कुल ठप है. एक समय 12 घंटे फैक्ट्री में काम होता था, मगर आज सिर्फ 8 घंटे ही काम हो रहा है. ऐसे में जब हम ही नहीं कमा पा रहे हैं, तो मजदूरों को कहां से पैसा दें.' प्रदीप सिंह की ऑईल फिल्टर बनाने की फैक्ट्री है, जहां 30 मजदूर काम करते थे, मगर अब सिर्फ 15 मजदूर ही काम कर रहे हैं. प्रदीप ने बताया कि कई मजदूर अब काम न होने के वजह से अपने घर लौट चुके हैं. अब उन्हें इंतज़ार है कि हालात जल्द से जल्द ठीक हो जाए और कारोबार पुरानी रफ्तार पकड़ ले.

नोटबंदी के बाद कैश की कमी ने ना सिर्फ मिडिल क्लास की कमर तोड़ दी है, बल्कि मजदूरी पेशा वर्ग को बड़े शहरों से पलायन पर मजबूर कर दिया है. दिल्ली के औद्योगिक इलाकों से लगभग 5 लाख मजदूरों का पलायन हो चुका है. नोटंबदी के बाद इन औद्योगिक इलाकों में कई फैक्टरियों में या तो काम ठप पड़ चुका है या कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली में लगभग 40 औद्योगिक इलाके हैं जिसमें सरकार द्वारा विकसित और गैर सरकारी भी शामिल हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा जैसे राज्यों से आए लगभग 15 लाख मजदूर इन इलाकों में काम कर अपनी रोजी रोटी कमाते हैं.


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