दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक 69 वर्षीय व्यवसायी महिला मीनाक्षी आहुजा को साइबर ठगों ने नौ दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के डर में रखा और 6.9 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. पुलिस के अनुसार, मीनाक्षी फर्नीचर व्यवसाय चलाती हैं और उनके पति की चार साल पहले मृत्यु हो चुकी है. उनकी एक बेटी गुरुग्राम में और बेटा ऑस्ट्रेलिया में रहता है.
'आपके नाम पर एक सिम कार्ड...'
पुलिस ने बताया कि 5 जनवरी से 13 जनवरी तक ठगों ने उन्हें लगातार डिजिटल निगरानी में रखा और खुद को कानून प्रवर्तन या जांच अधिकारी बताकर धमकाया. ठगों ने दावा किया कि उनके नाम पर एक सिम कार्ड खरीदा गया है और उसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हो रहा है. बाद में उन्हें बताया गया कि वे मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी मामलों की जांच में हैं और अगर सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराए 6.9 करोड़
भीषण मानसिक दबाव में मीनाक्षी को किसी से संपर्क न करने और ठगों के निर्देशों का पालन करने को मजबूर किया गया. इस दौरान उन्हें कुल 6.9 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने को कहा गया. 9 जनवरी को पहली बार 4 करोड़ रुपये और 12 जनवरी को 1.6 करोड़ तथा 1.3 करोड़ रुपये के दो और RTGS ट्रांजेक्शन कराए गए. ठगों ने यहां तक कहा कि वह स्वयं बैंक जाएं और ट्रांजेक्शन पूरा करें.
डर से बैंक वालों से भी कहा झूठ
पहली बड़ी राशि ट्रांसफर होने के बाद बैंक अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने महिला से वैरिफाई किया. डर के कारण मीनाक्षी ने कहा कि पैसे बेटी की प्रॉपर्टी के लिए ट्रांसफर किए जा रहे हैं. लगातार धमकी और डर के कारण महिला मदद नहीं मांग सकीं.
ठगी तब उजागर हुई जब ठगों ने सम्पर्क तोड़ दिया. 14 जनवरी को FIR दर्ज की गई और संबंधित बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई. यह दिल्ली में केवल एक सप्ताह में दूसरी बड़ी ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी है. पहले एक बुजुर्ग NRI दंपति को 14 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था. पुलिस ने बताया कि 2025 में दिल्ली में साइबर फ्रॉड में 1,250 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जबकि 2024 में यह 1,100 करोड़ रुपये थी. रिकवरी दर बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई है.