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सावधान! यमुना में छठ की डुबकी, दे सकती है कैंसर को न्यौता

क्या आप जानते हैं कि जिस यमुना नदी में आप बड़ी आस्था के साथ छठ पूजा करने जाना चाहते हैं, उसका पानी आप की सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा है?

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

राजधानी में आस्था का महापर्व छठ जोरशोर से मनाया जा रहा है, घाट सज चुके हैं. 26 अक्टूबर को बड़ी तादाद में आस्था में डूबे भक्त सूर्य देवता को अर्घ्य देने और यमुना नदी में डुबकियां लगाने घाट किनारे पहुंचेंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस यमुना नदी में आप बड़ी आस्था के साथ छठ पूजा करने जाना चाहते हैं, उसका पानी आप की सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा है?

 विशेषज्ञों की मानें तो यमुना नदी की जिस पवित्रता के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से घाट पहुंचते हैं, वही यमुना अब नदी कहलाने के भी लायक नहीं रही, क्योंकि यमुना में नजर आने वाला पानी इतना टॉक्सिक हो चुका है कि उसे नदी की संज्ञा देना भी गलत है. दरअसल राजधानी में सिर्फ 50 प्रतिशत सीवेज सिस्टम दुरुस्त हैं मतलब बाकी का 50 प्रतिशत सीवेज ड्रेनेज के ज़रिए यमुना में ही पहुंचता है. अब ऐसे में यमुना में प्रदूषण का स्तर बढ़ना लाज़मी है.

बीएल कपूर हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विवेक पाल सिंह के मुताबिक, यमुना अब नदी नहीं बल्कि गंदे नाले का रूप ले चुकी है, जिसमें अलग-अलग शहरों के कारखानों से निकलने वाला रसायन, औद्यौगिक कचरा, यमुना के किनारे बसे लोगों के मल-मूत्र और सीवर का पानी मिलता है. इतना ही नहीं दिल्ली में बह रही यमुना के 22 किलोमीटर की स्ट्रेच में करीब 18 नाले मिलते हैं,जो यमुना के पानी में सारे शहर की गंदगी समाहित कर देते हैं,  जिससे यमुना इतनी जहरीली हो चुकी है कि यमुना का पानी हाथ में लेने के भी लायक भी नहीं है. ऐसे में छठ व्रती लोगों को आस्था से ज्यादा अपनी सेहत को लेकर सतर्क होना चाहिए.

यमुना में डुबकी लगाएंगे, तो हो जाएंगे बीमार

डॉ. विवेक के मुताबिक, प्रदुषित यमुना के पानी से त्वचा संबंधी कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. सेंसेटिव स्किन के लोगों को कई बार प्रदूषि‍त पानी की वजह से स्किन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी जूझना पड़ता है. इतना ही नहीं यमुना में डुबकियां लगाने से यमुना का पानी कान-मुंह से शरीर के अंदर भी पहुंच जाता है, जिससे पेट से संबंधित बीमारी जैसे डायरिया, उल्टी-दस्त कोलेरा,टाइफाइड, हेपेटाइटिस बी होने का खतरा भी बना रहता है.

सीएसई ने भी चेताया , यमुना नहीं है सुरक्षित

सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरमेंट के अंतर्गत यमुना सफाई प्रोजेक्ट की रिसर्चर सुष्मिता सेन गुप्ता के मुताबिक यमुना की सफाई के नाम पर अब तक 1500 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. यमुना एक्शन प्लान 1, यमुना एक्शन प्लान 2 और 3 सब बन चुके हैं, लेकिन अफसोस कि आज भी ज़मीन पर कुछ नज़र नही आता. आज करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यमुना का पानी पहले से और ज्यादा गंदा हो चुका है. पानी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है. सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक यमुना के पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि उसे बाहरी कामों में भी यानी कि नहाने-धोने के काम में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.  ऐसे में छठ पर्व मनाने के लिए श्रद्धालुओं के यमुना में डुबकी लगाने की कल्पना करना भी किसी खतरे से कम नही है.

विशेषज्ञों ने आस्था के इस पर्व को मनाने के लिए लोगों से अपील की है कि छठ पूजा के लिए श्रद्धालु नदी और घाटों से दूर कृत्रिम तरीकों का इस्तेमाल करें. इससे बदहाल होती यमुना नदी और लोगों की सेहत दोनों में सुधार होगा. विशेषज्ञों ने ये भी तर्क दिया कि अगर प्रदूषि‍त यमुना के पानी से श्रद्धालु पूजा करेंगे, तो प्रकृति की देवी और साफ-सफाई पसंद छठी मैया भी निराश होंगी और इसका सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ेगा.

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