दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में महापौर और उपमहापौर के चुनाव की तारीख तय हो चुकी है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एमसीडी के सदन की पहली बैठक छह जनवरी को तय की है, जिसमें पहले पार्षद को शपथ दिलाई जाएगी. इसके बाद मेयर, उप मेयर और सदन की स्थायी समिति के छह सदस्य भी इसी दिन चुने जाएंगे. ऐसे में दिल्ली का पहला मेयर जो भी बनेगा, उसका कार्यकाल महज तीन महीने का ही होगा. 25 साल पहले भी ऐसी स्थिति बनी थी.
उपराज्यपाल वीके सक्सेना से इजाजत मिलने के बाद एमसीडी ने सदन की पहली बैठक की तैयारी शुरू कर दी है. दिल्ली के मेयर चुनाव की अधिसूचना सोमवार को जारी हो सकती है. माना जा रहा है कि महापौर और उप महापौर पद के लिए 26 दिसंबर से नामांकन पत्र दाखिल कराने की प्रक्रिया शुरू होगी और 30 दिसंबर तक जारी रहेगी. अगर चुनाव की नौबत आने पर निगम प्रशासन बैलेट पेपर छपवाने का समय चाहिए, क्योंकि 6 जनवरी को मेयर का चुनाव है.
बता दें कि उपराज्यपाल वरिष्ठ पार्षद को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करेंगे. मध्य जिले के जिला जज शपथ दिलाएंगे. इसके बाद पीठासीन अधिकारी सभी पार्षदों को बारी-बारी से शपथ दिलाएंगे. शपथ ग्रहण के बाद महापौर का चुनाव होगा. मेयर के कार्यभार संभालने के बाद सबसे पहले उपमहापौर का चुनाव कराएंगे. इसके साथ ही स्थायी समिति के छह सदस्यों का भी चुनाव होगा.
पहली मेयर महिला चुनी जाएगी
एमसीडी के सदन का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन मेयर का कार्यकाल एक साल के लिए होता है. एमसीडी एक्ट के तहत पहले साल महिला पार्षद को मेयर चुने जाने का प्रावधान है, जबकि उपमेयर के मामले में कोई नियम नहीं है. इसके बाद दूसरे साल मेयर का पद सामान्य होता है, जिसमें कोई भी पार्षद चुना जा सकता है, लेकिन तीसरे साल मेयर पद दलित समुदाय के लिए रिजर्व होता है. ऐसे में दलित समाज से आने वाला कोई भी पार्षद मेयर चुना जा सकता है, लेकिन चौथे और पांचवें साल मेयर का पद अनारक्षित होता है. एमसीडी की सबसे अधिकार वाली स्थायी समिति के अध्यक्ष पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है.
मेयर का कार्यकाल क्यों तीन महीने?
दिल्ली एमसीडी का मेयर पद के लिए छह जनवरी को चुनाव है. ऐसे में जो भी पार्षद छह जनवरी के लिए मेयर पद के लिए चुनी जाएंगी, उनका कार्यकाल 31 मार्च 2023 को समाप्त हो जाएगा. इस तरह से तीन महीने ही पहले मेयर का कार्यकाल होगा. दरअसल डीएमसी एक्ट की धारा दो (67) के अनुसार एमसीडी का अप्रैल माह के प्रथम दिन से वर्ष शुरू होता है और इस तरह 31 मार्च को वर्ष समाप्त हो जाता है. लिहाजा अप्रैल माह में दूसरे महापौर का चुनाव होगा.
चार साल के बाद आएगी महिला मेयर बारी
सदन की बैठक अप्रैल माह से पहले होने का खामियाजा महिला पार्षदों को भुगतना पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए पहले वर्ष महापौर का पद आरक्षित है. अगले चार साल के दौरान महिला पार्षद को महापौर पद का उम्मीदवार बनाने मामला सियासी दल पर निर्भर रहेगा, लेकिन चार साल तक महिला के लिए आरक्षण नहीं मिल सके. दिसंबर में चुनाव होने की वजह से असर मेयर के चुनाव पर पड़ रहा है.
25 साल पहले ऐसी ही स्थिति आई थी
साल 1997 में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी, जब एमसीडी के चुनाव फरवरी महीने में कराए गए थे. ऐसे में चुनाव के बाद एमसीडी के सदन के गठन की कवायद आरंभ कर दी गई. हालांकि, उस दौरान डीएमसी एक्ट के चलते जानकारों ने बताया था कि एमसीडी का वर्ष 31 मार्च को खत्म होता है. इसके कारण पहले साल महिला महापौर का कार्यकाल एक माह बाद ही समाप्त हो जाएगा.
इन्हीं कारणों के चलते एमसीडी के सदन की पहली बैठक 1997 में अप्रैल माह में आयोजित की गई थी और उस बैठक में ही महापौर का चुनाव कराया गया था. इस तरह फरवरी महीने में चुने गए पार्षद एक महीन से अधिक समय तक खाली रहे थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका है. एमसीडी सदन की बैठक बुला ली गई है, जिसमें मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से पहली महिला मेयर महज तीन महीने तक ही अपने पद पर रह सकेंगी. एमसीडी सचिवालय एक सदन के कार्यकाल में महापौर का छठा चुनाव नहीं कराता है. लिहाजा साल 2026 में महापौर का चुनाव नहीं हो सकेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि एमसीडी के 5 साल के कार्यकाल में 5 बार ही महापौर के चुनाव का प्रावधान है. ऐसे में उस समय पहले ही एमसीडी के चुनाव कराए जाएंगे. इस तरह से 2026 में एमसीडी का चुनाव होगा?
बता दें, दिल्ली एमसीडी में कुल 250 पार्षद हैं. आम आदमी पार्टी के पास 134 पार्षद हैं तो बीजेपी के पास 104 पार्षद और कांग्रेस के पास नौ सदस्य व निर्दलीय 3 सदस्य हैं. सदन की व्यवस्था के अनुसार कांग्रेस और निर्दलीय आम आदमी पार्टी को समर्थन नहीं करते हैं तो विपक्ष में बैठेंगे. वहीं, भाजपा मजबूत विपक्ष की भूमिका में होगी. ऐसे में अगर तीन महीने के बाद फिर चुनाव होंगे और ऐसी स्थिति में अगर आम आदमी पार्टी के कुछ पार्षद इधर से ऊधर हुए तो मेयर का चुनाव दिलचस्प हो जाएगा. ऐसी स्थिति हर साल मेयर पद के चुनाव के वक्त नजर आएगी?
मेयर के चुनाव में ये हैं वोटर
दिल्ली नगर निगम में 250 पार्षदों के साथ 10 सांसद (3 राज्यसभा सांसद और 7 लोकसभा सांसद) और 13 विधानसभा सदस्य मतदान करेंगे. आम आदमी पार्टी ने 250 वार्ड में से 134 वार्ड पर जीत हासिल की है. बीजेपी को 104 सीटों मिली हैं यानी 273 वोटर मेयर के चुनाव के लिए वोटिंग करेंगे. ये साफ हो गया है कि 137 बहुमत का आंकड़ा मिलने वाली राजनीतिक पार्टी का ही मेयर होगा. आप के 134 पार्षद, 3 राज्यसभा सांसद भी 'आप' से ही हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी के मेयर उम्मीदवार को बहुमत मिलने की काफी संभावना है.