दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत अंतर्धार्मिक शादी करने वाले जोड़े के घर पर नोटिस भेजने पर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को नोटिस जारी किया है. इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी माना है कि एसडीएम के इस कदम से जोड़े की जान को भी खतरे में डाल दिया था. क्योंकि महिला को उसके परिवार वालों ने कैद कर लिया था. इसके बाद पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद ही महिला को घर से छुड़वाया गया.
हाईकोर्ट ने कहा, विशेष विवाह अधिनियम दो वयस्कों को दूसरों के हस्तक्षेप के बिना अपनी शादी को रजिस्टर्ड कराने की अनुमति देने के लिए बनाया गया. दिल्ली हाईकोर्ट ने 2009 में सभी डीएम और एसडीएम को आदेश दिया था कि वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी के इच्छुक जोड़ों के घरों पर नोटिस नहीं भेजेंगे. ऐसी शादियों के नोटिस को सिर्फ एसडीएम ऑफिस के बाहर चिपकाया जा सकता है.
कोर्ट ने 2009 के अपने आदेश में कहा था कि दो वयस्कों की शादी की जानकारी उजागर करना कुछ स्थितियों में, विवाह को ही खतरे में डाल सकता है. कुछ स्थितियों में माता पिता के हस्तक्षेप के चलते यह एक या दूसरे पक्ष के जीवन को खतरे में भी डाल सकता है.
एसडीएम को कोर्ट ने भेजा अवमानना नोटिस
जस्टिस नजमी वजीरी की बेंच ने दक्षिण पश्चिम दिल्ली के एसडीएम को अवमानना नोटिस जारी किया है. बेंच ने एसडीएम को अगली सुनवाई पर जवाब के साथ पेश होने को कहा है. बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि विवाह अधिकारियों को विशेष रूप से उक्त प्रक्रिया का पालन करने और आवेदकों के घरों पर नोटिस जारी ना करने के लिए कहा जाता है. कोर्ट ने आगे कहा, इस तरह के नोटिस आवेदकों के शादी की योजना को या उनकी जान को खतरे में डाल सकते हैं.