दिल्ली में हवा में जहर घुला हुआ है. प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से GRAP-4 लागू है. सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल साफ कह चुके हैं कि राजधानी की हवा से अब कोई समझौता नहीं होगा. नियम भी साफ हैं-निर्माण कार्य पूरी तरह बंद होंगे, भारी वाहनों की एंट्री पर रोक और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी.
लेकिन आजतक के ग्राउंड रियलिटी चेक में सामने आया कि आदेश और अमल के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है. आइए जानते हैं कि ग्राउंड रिऐलिटी में आजतक की टीम ने अपनी आंखों से कैसे नियमों की धज्जियां उड़ते हुए देखीं. कहां-कैसे दिन के उजाले को बचाकर रात में धड़ल्ले से चल रहा काम.
वीवीआईपी इलाकों में भी बेखौफ उल्लंघन
आजतक की टीम जब GRAP-4 की जमीनी हकीकत जानने निकली, तो सबसे पहले सवाल यही उठा कि क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? नई दिल्ली के वीवीआईपी इलाकों में रात के वक्त भारी वाहनों की आवाजाही देखने को मिली. GRAP-4 के तहत जिन सीमेंट बल्कर और कंस्ट्रक्शन से जुड़े ट्रकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, वही वाहन आधी रात के बाद सड़कों पर चलते पाए गए.
टीम को ये भी पता चला कि कुछ मामलों में इन ट्रकों को कंस्ट्रक्शन साइट तक पहुंचाने के लिए अलग वाहनों से एस्कॉर्ट किया जा रहा था. यानी मामला सिर्फ नियम तोड़ने का नहीं, बल्कि संगठित तरीके से प्रतिबंधों को दरकिनार करने का है.
आदेश लागू है, काम बंद नहीं
रियलिटी चेक के दौरान कई कंस्ट्रक्शन साइट्स पर रात के समय गतिविधियां जारी पाई गईं. ट्रैक्टर, जेसीबी और अन्य मशीनें काम करती मिलीं. GRAP-4 के दौरान जहां एक ईंट रखने की इजाजत नहीं है, वहां पूरा सिस्टम सामान्य दिनों की तरह चलता दिखा. काम कर रहे लोगों ने माना कि उन्हें GRAP-4 की जानकारी है, लेकिन आदेशों के बावजूद काम बंद नहीं कराया गया. इससे ये सवाल उठता है कि जब नियम सबको पता हैं तो पालन क्यों नहीं हो रहा?
पहचान छिपाने की कोशिश
टीम ने ये भी पाया कि कई ट्रकों के नंबर जानबूझकर ढके या छिपाए गए थे. ये कोई संयोग नहीं था, बल्कि साफ संकेत था कि नियम तोड़ने वालों को अपने गैरकानूनी काम का अंदाज़ा है. अगर सब कुछ वैध होता तो पहचान छिपाने की ज़रूरत क्यों पड़ती?
GRAP-4 के बीच धुआं
दिल्ली में GRAP-4 के दौरान खुले में किसी भी तरह का जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद कई साइट्स पर गार्ड और मजदूर ठंड से बचने के लिए लकड़ी या अन्य सामग्री जलाते मिले. यही वो धुआं है, जिसे NGT दिल्ली के लिए सबसे खतरनाक बता चुका है.
बॉर्डर पर सख्ती, शहर के अंदर लापरवाही
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर आजतक की टीम को सख्त चेकिंग देखने को मिली. हर ट्रक रोका जा रहा था. BS-6 और CNG के अलावा किसी भी वाहन को दिल्ली में एंट्री नहीं दी जा रही थी. कंस्ट्रक्शन मटीरियल ले जा रहे ट्रकों को वापस लौटाया जा रहा था.
कागज़ों और बॉर्डर पर सिस्टम पूरी तरह सक्रिय दिखा.लेकिन जैसे ही टीम शहर के अंदर पहुंची, तस्वीर बदल गई. BS-4 ट्रक खुलेआम सड़कों पर चलते मिले. कुछ ट्रक कंस्ट्रक्शन मटीरियल उतारकर लौट रहे थे. कुछ मामलों में ड्राइवरों ने पहले माफी मांगी, फिर बहाने बनाए और यहां तक कि सवाल पूछने पर गलत तरीके अपनाने की कोशिश भी की.
पुलिस की मौजूदगी समय के साथ गायब
एक अहम खामी यह भी सामने आई कि रात के शुरुआती घंटों में पुलिस की चेकिंग तो थी, लेकिन देर रात होते-होते निगरानी लगभग खत्म हो गई. जब चेकिंग ही नहीं, तो प्रतिबंधित वाहनों को रोकने वाला भी कोई नहीं. यही वजह है कि GRAP-4 के बावजूद भारी और प्रदूषण फैलाने वाले वाहन शहर में दाखिल हो पा रहे हैं.
बड़ा सवाल: सिस्टम की जिम्मेदारी तय होगी?
आजतक के इस रियलिटी चेक ने साफ कर दिया है कि समस्या सिर्फ नियमों की नहीं, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और अमल की है. जब सुप्रीम कोर्ट और NGT के आदेशों को ज़मीन पर गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तो GRAP-4 जैसे सख्त नियम भी सिर्फ कागज़ी कवायद बनकर रह जाएंगे.
सवाल अब सिर्फ ये नहीं कि उल्लंघन हुआ. सवाल ये है कि क्या बिना सिस्टम की मिलीभगत के इतना बड़ा उल्लंघन संभव है? क्योंकि जब नियम दिन में दिखते हैं और रात में गायब हो जाते हैं तो जहरीली होती हवा की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी.