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'मुफ्तखोरी' या कल्याणकारी राज्य? फ्री सुविधाएं देकर भी केजरीवाल सरकार का खजाना है मजबूत

Delhi Election: दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद फिर इस तरह की बातें होने लगी हैं कि केजरीवाल सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा लुटाकर मुफ्तखोरी को बढ़ावा दे रही है. लेकिन इसमें कितना सच है, क्या केजरीवाल सरकार दिल्ली का खजाना खाली कर रही है? इसका एक आकलन...

Delhi Election: दिल्ली में एक बार फिर केजरीवाल सरकार बन रही है (फोटो: विक्रम शर्मा) Delhi Election: दिल्ली में एक बार फिर केजरीवाल सरकार बन रही है (फोटो: विक्रम शर्मा)

  • दिल्ली में 62 सीटों पर जीत के साथ बन रही AAP सरकार
  • इस जीत में बिजली-पानी फ्री करने का बड़ा योगदान
  • विपक्ष का फिर केजरीवाल की नीतियों पर हमला
  • दिल्ली की जनता को मुफ्तखोर तक बताया जा रहा

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद विपक्षी धड़ा दिल्ली वालों को मुफ्तखोर तक कहने लगा है और सोशल मीडिया पर ऐसी बातें चल रही हैं कि केजरीवाल सरकार ने टैक्सपेयर्स का पैसा लुटाकर जनता को भरमा लिया है. लेकिन इसे आप केजरीवाल सरकार का कौशल कहें या बाजीगरी, सच तो यह है कि तमाम फ्री सेवाओं और योजनाओं के बावजूद पिछले पांच साल में AAP के शासन में दिल्ली सरकार का खजाना मजबूत रहा है और जीडीपी के लिहाज से दिल्ली देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले राज्यों में से है.

आम आदमी पार्टी  के शासन में दिल्ली ने न सिर्फ तेज बढ़त की है, बल्कि उसने राष्ट्रीय जीडीपी में अपना हिस्सा भी बढ़ाया है. दिल्ली के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पिछले पांच साल में 11.8 फीसदी की बढ़त हुई है.

गौरतलब है कि 2020 विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आप सरकार बनने जा रही है. आम आदमी पार्टी इस चुनाव में 62 सीटें जीतने में कामयाब हुई है.

ये हैं केजरीवाल सरकार की मुफ्त योजनाएं

  • महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा
  • 200 यूनिट तक बिजली फ्री
  • 20 हजार लीटर से कम पानी पर कोई बिल नहीं
  • बहुत गरीब बच्चों का 100 फीसदी फीस माफ
  • 200 मोहल्ला क्लीनिक में मुफ्त उपचार, दवाएं और टेस्ट
  • गरीबों के लिए निजी अस्पतालों में सर्जरी का पैसा सरकार देगी
  • सड़क दुर्घटना और जलने पर व्यक्ति का मुफ्त इलाज
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुख्यमंत्री मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना

बिजली से लेकर पानी तक सब फ्री

दिल्ली में 200 यूनिट तक की बिजली को केजरीवाल सरकार ने फ्री कर दिया है. इसके पहले 400 यूनिट बिजली के बिल में दिल्ली सरकार 50 प्रतिशत तक छूट देती थी. तब 1600-1700 करोड़ रुपये की सब्सिडी सरकार को बिजली कंपनियों को देनी पड़ती थी. इन उपभोक्ताओं के लिए फिक्स्ड चार्ज भी हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि अब बिजली के लिए सरकार से मिलने वाली सब्सिडी का आंकड़ा ढाई हजार करोड़ रुपये सालाना पहुंच जाएगा.

अरविंद केजरीवाल सरकार के फैसले से दिल्ली में 26 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा. विभागीय आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में वर्ष 2018-19 में दो सौ यूनिट के बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 26 लाख थी, वहीं दौ सौ से चार सौ यूनिट वाले उपभोक्ताओं की संख्या 14 लाख थी.

दिल्ली में कुल 47 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं. 2018-19 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने 1699 करोड़ रुपये सिर्फ बिजली की सब्सिडी के लिए जारी किए थे. पिछले 5 साल से बिजली की कीमतों में कोई बढ़त नहीं हुई. इसके अलावा दिल्ली में बिजली का बिल सबसे सस्ता है.

पानी पर करीब साढ़े चार सौ करोड़ रुपये सब्सिडी पहले से दी जा रही है. मुफ्त मेट्रो सफर की भी सुविधा शुरू हुई तो 1500 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये की और सब्सिडी बढ़ेगी. डीटीसी व क्लस्टर बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर कराने के एवज में दिल्ली सरकार साल में 140 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

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रेवेन्यू सरप्लस में है दिल्ली सरकार

अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार का राजस्व यानी रेवेन्यू मुफ्त बिजली व पानी देकर भी सरप्लस (लाभ) में चल रहा है. उसे इन मुफ्त योजनाओं के लिए किसी तरह का कर्ज नहीं लेना पड़ा है. देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दिल्ली सरकार रेवेन्यू सरप्लस में रही है.

यह सरप्लस तब है जबकि राज्य को केंद्र से मिलने वाला अनुदान घट गया है. दिल्ली सरकार को 2016-17 में 2,825 करोड़ रुपए का अनुदान केंद्र से मिला था, जबकि 2017-18 में दिल्ली को केंद्र से 2,184 करोड़ रुपए का अनुदान मिला. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में दिल्ली सरकार ने 5,236 करोड़ रुपए के रेवेन्यू सरप्लस का अनुमान रखा है. 2018-19 में राज्य सरकार का अनुमानित रेवेन्यू सरप्लस 4,931 करोड़ रुपए था.

अन्य राज्यों से बेहतर

इन पांच साल में राजस्व संतुलन के मामले में जहां राष्ट्रीय औसत राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के शून्य से नीचे या उससे थोड़ा ऊपर रहा है, वहीं दिल्ली का औसत 1.6 फीसदी से लेकर 0.6 फीसदी तक रहा है. (यहां शून्य से नीचे यानी माइनस होने का मतलब घाटा होना है )

इसी प्रकार, राजकोषीय संतुलन की बात करें तो पांच साल में दिल्ली का औसत जहां जीएसडीपी के 0.24 फीसदी से -0.7 फीसदी रहा है, वहीं राष्ट्रीय औसत -2.4 से -3.5 फीसदी रहा है. यानी इस मामले में भी दिल्ली का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से अच्छा रहा है.

दिल्ली में राजस्व संतुलन लगातार पॉजिटिव बना रहा है. राजस्व संतुलन का मतलब होता है कि सरकार का जो राजस्व खर्च है और जो राजस्व प्राप्तियां हैं उनमें अंतर कितना है. अगर यह अंतर नेगेटिव है तो इसका मतलब है कि सरकार आमदनी से ज्यादा खर्च कर रही है. इसी तरह केजरीवाल सरकार का राजकोषीय घाटा पूरे देश में सबसे कम है.

श‍िक्षा और स्वास्थ्य पर जमकर खर्च

आम आदमी पार्टी की सरकार ने श‍िक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च काफी बढ़ाया है. 2015-16 से 2019-20 (APP सरकार के पांच साल) के दौरान श‍िक्षा पर खर्च करने का बाकी पूरे देश का औसत जहां 14.8 फीसदी था, वहीं दिल्ली सरकार ने इस पर 25.3 फीसदी खर्च किया. इसी तरह इस दौरान चिकित्सा और जनस्वास्थ्य-परिवार कल्याण पर खर्च करने का देश का औसत जहां 4.9 फीसदी था, वहीं दिल्ली सरकार ने इस पर 12.5 फीसदी खर्च किया.

delhi-school_01_101718040654_021220052012.jpgदिल्ली का एक सरकारी स्कूल

कल्याणकारी बजट

पिछले साल 26 फरवरी को दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पेश किया था. इसके मुताबिक  2018-19 में दिल्ली का राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 7,79,652 करोड़ रुपये था जो एक साल पहले 6,90,098  करोड़ रुपये के मुकाबले 13 फीसदी ज्यादा है.

वित्त वर्ष 2019-20 के लिए दिल्ली सरकार ने 60,000 करोड़ रुपये का कुल व्यय तय किया था, जो 2018-19 के संशोध‍ित अनुमान से 19.5 फीसदी ज्यादा है. 2018-19 के संशोध‍ित अनुमान के मुताबिक दिल्ली सरकार ने तय एक्सपेंडीचर बजट से 2,800 करोड़ रुपये कम खर्च किया है.

इस बजट में दिल्ली सरकार ने ट्रांसपोर्ट के बजट में 38 फीसदी की बढ़त, श‍िक्षा के बजट में 35 फीसदी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के बजट में 25 फीसदी की बढ़त की है. हालांकि बजट में दिल्ली सरकार ने 15,219 करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर तय किया था, जो वित्त वर्ष 2018-19 के संशोध‍ित अनुमान से 47.7 फीसदी ज्यादा है.

दिल्ली का खर्च अन्य राज्यों कितना है अलग

मद    दिल्ली   अन्य राज्यों का औसत 
 श‍िक्षा 27.8%  15.9%
 स्वास्थ्य 13.8%  5.2%
 जलापूर्ति एवं स्वच्छता 2.5%    2.4%
 शहरी विकास   6.9%   3.4%
 सड़क एवं पुल  4.6%      4.3%
 ऊर्जा  3.3%     5.2%
- - (कुल खर्च का हिस्सा)

कहां से आता है पैसा

दिल्ली सरकार को आमदनी टैक्स, केंद्रीय अनुदान, लाभांश आदि से होती है. वित्त वर्ष 2019-20 में दिल्ली को ग्रांट यानी अनुदान और एड के रूप में 6,717  करोड़ रुपये आने का अनुमान है जो 2018-19 के संशोध‍ित अनुमान से 16.3 फीसदी ज्यादा है. इसके अलावा सरकार को गैर टैक्स स्रोत के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है. इनमें ब्याज,लाभांश, रॉयल्टी आदि शामिल हैं.

केंद्र से जीएसटी अनुदान

इस वित्त वर्ष में दिल्ली सरकार को वस्तु एवं सेवा कर (GST) पर होने वाले नुकसान की भरपाई के रूप में केंद्र सरकार से 3,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. इसके पिछले वित्त वर्ष में दिल्ली को इस भरपाई के रूप में 3500 करोड़ रुपये हासिल हुए थे.

टैक्स राजस्व

दिल्ली सरकार को इस वित्त वर्ष यानी 2019-20 में कर राजस्व के रूप में 42,500 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है. यह 2018-19 के संशोध‍ित अनुमान से करीब 11 फीसदी ज्यादा है.

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कहां से बचाया पैसा

असल में आम आदमी पार्टी की सरकार पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडीचर में कटौती कर पैसा श‍िक्षा और स्वास्थ्य के मौजूदा सुविधाओं पर खर्च कर रही है. कैपिटल एक्सपेंडीचर में कटौती का मतलब यह है कि नए स्कूल और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचा विकास का काम कम हो रहा है या उन पर कम पैसा खर्च हो रहा है. इसकी जगह सरकार मौजूदा अस्पतालों और स्कूलों को बेहतर बनाने पर ज्यादा जोर दे रही है. हालांकि, इसके बावजूद सड़कों और पुलों पर दिल्ली सरकार का खर्च बजट के फीसदी हिस्से में देखें तो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.

सरकार का यह भी दावा है कि उसने भ्रष्टाचार को खत्म कर पुलों, सड़कों आदि के निर्माण का खर्च काफी कम कर दिया है. तो यह नहीं कहा जा सकता कि AAP सरकार जनता या टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद कर रही है. ऐसा लगता है कि यह सरकार बजट का सही तरीके से प्रबंधन कर पैसे बचा रही है और उसे लोक कल्याणकारी कार्यों पर खर्च कर रही है.

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