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केजरीवाल के डेनमार्क दौरे को मंजूरी नहीं, AAP बोली- हमारा कसूर क्या है

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीतिक म‍ंजूरी नहीं मिलने के कारण सी-40 जलवायु सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएंगे. जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने इस दौरे के लिए केजरीवाल को म‍ंजूरी देने से इनकार कर दिया.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो-PTI) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो-PTI)

  • केजरीवाल को नहीं मिली डेनमार्क जाने की अनुमति
  • संजय सिंह ने केंद्र पर लगाए कई आरोप, साधा निशाना

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीतिक म‍ंजूरी नहीं मिलने के कारण सी-40 जलवायु सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएंगे. जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने इस दौरे के लिए केजरीवाल को म‍ंजूरी देने से इनकार कर दिया है. केजरीवाल को मंजूरी नहीं मिलने पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के खिलाफ इतनी बुरी इच्छाशक्ति के साथ काम कर रही है.

संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल वहां मौज करने के लिए नहीं जा रहे थे बल्कि उनका यह दौरा एशिया के शीर्ष 40 शहरों के मेयर को यह समझाने के लिए कि दिल्ली के प्रदूषण में 25% की कमी कैसे हुई? वह दिल्ली के प्रदूषण पर 'विषम-सम' के लाभ की व्याख्या करने जा रहे थे.

संजय सिंह ने मोदी सरकार पर हमला बोला

उन्होंने कहा कि केजरीवाल वहां देश की अच्छी छवि को प्रस्तुत करते लेकिन केंद्र सरकार ने अरविंद केजरीवाल को अनुमति देने से इनकार कर दिया. साथ ही संजय सिंह ने कहा, 'डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया दिल्ली शिक्षा प्रणाली के बारे में बात करने के लिए मास्को जाना चाहते थे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई थी. हमारा अपराध क्या है?'

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की छवि को धूमिल करने की कोशिश की है. क्या संघीय संरचना ऐसे ही काम करती है. यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. बता दें कि केजरीवाल मंगलवार को दोपहर 2 बजे सम्मेलन के लिए रवाना होने वाले थे.

केजरीवाल सम्मेलन में भारत की 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले थे. सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फरहाद हकीम को सम्मेलन में शामिल होने की मंजूरी दे दी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा?

विदेश के मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'मैं राजनीतिक मंजूरी के लिए सवालों का जवाब नहीं देना चाहता. यदि आप समझदार हैं तो आपको इस की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी होगी. हमें हर महीने मंत्रालयों, सचिवों, नौकरशाहों से राजनीतिक मंजूरी के लिए सैकड़ों अनुरोध मिलते हैं. एक निर्णय कई सूचनाओं पर आधारित होता है.'

उन्होंने कहा कि सम्मेलन की प्रकृति का भी ध्यान रखा जाता है जहां व्यक्ति भाग लेने जा रहा है. अन्य देशों की भागीदारी के स्तर को भी ध्यान में रखकर इस तरह के निमंत्रण को भी मंजूरी दी जाती है.

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