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दिल्ली: BJP नेता के नाम से फर्जी लेटर सर्कुलेट! किसान आंदोलन के खिलाफ लिखी बातें

दिल्ली बीजेपी के नेता राजेश भाटिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके लेटर हेड पर किसी ने फर्जी पत्र सर्कुलेट किया है. इस पत्र में किसान आंदोलन के खिलाफ लिखा गया है. भाटिया ने कहा कि बीजेपी नेता के नाम पर किसानों के बीच फ़ेक न्यूज़ फैलाई जा रही है. जिसको लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है.

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दिल्ली बीजेपी के नेता राजेश भाटिया
दिल्ली बीजेपी के नेता राजेश भाटिया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में BJP नेता के नाम से फर्जी लेटर सर्कुलेट
  • लेटर में किसान आंदोलन के खिलाफ लिखी गई बातें
  • दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज, जांच जारी

दिल्ली बीजेपी के नेता राजेश भाटिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके लेटर हेड पर किसी ने फर्जी पत्र सर्कुलेट किया है. इस पत्र में किसान आंदोलन के खिलाफ लिखा गया है. भाटिया ने कहा कि बीजेपी नेता के नाम पर किसानों के बीच फ़ेक न्यूज़ फैलाई जा रही है. जिसको लेकर शिकायत दर्ज कराई गई. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. 

बीजेपी नेता का फर्जी लेटर सर्कुलेट 

दरअसल, दिल्ली प्रदेश बीजेपी के नेता राजेश भाटिया ने रविवार को कहा है कि उनके किसी भी ऑफिस बियरर या पूर्व ऑफिस बियरर द्वारा कोई लेटर नहीं जारी किया गया है. साथ ही किसानों और सरकार के बीच चल रही वार्ता के संदर्भ में भी कुछ भी नहीं लिखा गया है. भाटिया ने कहा कि मेरी तरफ से किसी भी आंदोलन के लिए तैयार रहने के लिए भी नहीं कहा गया है. मेरे लेटर हेड पर सर्कुलेट किया गया पत्र फर्जी है. 

पार्टी ने किया खंडन 

वहीं, इस मसले पर दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि, 'प्रदेश इकाई के पूर्व महासचिव राजेश भाटिया के नाम से जारी एक पत्र पूरी तरह से भ्रामक और फर्जी है. इस संबंध में,दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है. साथ ही इस पर गहनता से जांच की मांग की गई है.' नवीन कुमार ने जनता से अपील करते हुए कहा कि वे उन लोगों के उकसावे या प्रभाव में न आएं, जो फर्जी और भ्रामक खबरें फैलाकर तनाव पैदा करना चाहते हैं. 

मालूम हो कि केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 50 दिन से भी ज्यादा समय से जारी है. सरकार और कृषि संगठनों के बीच कई राउंड की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है. किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं तो सरकार इसमें संशोधन की बात कर रही है. ऐसे में ये आंदोलन कब तक चलता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं. 


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