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पुलिस का रूप लेकर करते हैं ऑनलाइन लूट, साइबर अपराधियों की इस हरकत से चिंता में दिल्ली HC

साइबर अपराध के मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में आज सुनवाई हुई है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान इसकी गंभीरता पर जोर दिया. अदालत ने माना कि साइबर क्राइम एक गंभीर मुद्दा है और सरकारों को इस संबंध में तत्काल प्रभाव से कोई ठोस उपाय करने की जरूरत है.

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साइबर क्राइम
साइबर क्राइम

दिल्ली हाई कोर्ट ने हर किसी को प्रभावित करने वाली एक वास्तविक समस्या के रूप में साइबर अपराध की गंभीरता पर जोर दिया है. अदालत ने शिकायतें दर्ज करने के लिए एक सरल प्रक्रिया अपनाने, जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने और समस्या के समाधान के लिए अन्य उपाय अपनाने का सुझाव दिया.

पुलिस सुधार और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए अदालत ने कहा कि साइबर अपराधी अपने लक्ष्यों में भेदभाव नहीं करते हैं, जिससे विभिन्न व्यवसायों के लोगों के लिए खतरा पैदा होता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने साइबर अपराध से निपटने में जागरूकता की जरूरतों पर जोर दिया.

साइबर क्राइम को लेकर दायर की गई है याचिका

अदालत साइबर अपराधों में बढ़ोतरी से संबंधित एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अदालती आदेशों की जालसाजी और अनजान नागरिकों से 'सेटलमेंट मनी' की जबरन वसूली शामिल है. याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय और राज्य साइबर सेल वेबसाइटों की स्थिति के बारे में चिंता जताई और साइबर अपराध की शिकायतों की रिपोर्ट करने के लिए जागरूकता अभियान और इसे सरल बनाने की अपील की.

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याचिकाकर्ताओं को हलफनामा दायर करने का निर्देश

याचिका के महत्व को स्वीकार करते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ताओं से मौखिक बहस के इतर हलफनामा दायर करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी को तय की गई है, अदालत ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से ईमेल के माध्यम से साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक सरल डिजिटल सुविधा लागू करने पर विचार करने की अपील की है.

सरकारी अधिकारी, पुलिस का रूप लेकर अपराधी करते हैं लूट

अदालत ने वर्तमान नंबर 1089 और साइबर अपराध मामलों को रोकने के लिए तत्काल  उपाय का निर्देश दिया है. अदालत ने साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों का रूप धारण कर साइबर लूट करने की घटनाओं पर चिंता जताई. अदालत ने माना कि इससे आपराधिक न्याय सिस्टम पर लोगों का विश्वास उठ सकता है. अदालत ने निर्दोष लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए सीधे खतरे से निपटने पर जोर दिया.

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