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क्या ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में भी कोई नहीं मरा?

रिपोर्ट के मुताबिक जिस 36 घंटे में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा कमी थी तब भी जयपुर गोल्डन सहित चार बड़े कोविड अस्पतालों में एक भी मरीज ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं मरा, जबकि सात घंटों में 21 मरीजों की मौत सिर्फ जयपुर गोल्डन अस्पताल में ही हुई थी.

अप्रैल में ऑक्सीजन को लेकर दिल्ली में त्राहिमाम की स्थिति बनी रही (सांकेतिक-पीटीआई) अप्रैल में ऑक्सीजन को लेकर दिल्ली में त्राहिमाम की स्थिति बनी रही (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑक्सीजन की कमी के दौर में चार कोविड अस्पतालों में एक भी मौत नहीं
  • 21 मरीजों में से 20 मरीजों को तो पहले से ही गंभीर बीमारियां थींः रिपोर्ट
  • राज्यों की सफाई, केंद्र ने मौत की वजह को लेकर ब्योरा तलब ही नहीं किया

केंद्र सरकार के एक बयान पर बवाल तो मच गया लेकिन राज्यों में सरकार किसी भी पार्टी की हो किसी ने भी केंद्र को ये नहीं बताया कि उनके यहां अमुक तारीख को इतने-इतने मरीज ऑक्सीजन की कमी से मारे गए. दिल्ली सरकार की समिति ने भी यही रिपोर्ट दी.

दिल्ली सरकार की ओर से मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नरेश कुमार की अध्यक्षता में 27 अप्रैल को बनाई गई विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट का भी लब्बोलुआब कुछ यही है.

रिपोर्ट के मुताबिक जिस 36 घंटे में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा कमी थी तब भी जयपुर गोल्डन सहित चार बड़े कोविड अस्पतालों में एक भी मरीज ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं मरा जबकि 23 अप्रैल की रात से 24 अप्रैल की सुबह तक सात घंटों में 21 मरीजों की मौत सिर्फ जयपुर गोल्डन अस्पताल में ही हुई थी.

क्या कहती है रिपोर्ट

इन 21 मरीजों का ब्यौरा देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 20 मरीजों को तो पहले से ही गंभीर बीमारियां थीं. उनके मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक उनमें लोग डायबिटीज, हायपरटेंशन, हृदय रोग या थायरॉयड से ग्रसित थे. उनको अंतिम समय तक ऑक्सीजन दी जा रही थी. ये अलग बात है कि वो ऑक्सीजन पाइप लाइन के जरिए नहीं बल्कि सिलेंडर्स के जरिए दी जा रही थी. इस वजह से ऑक्सीजन का फोर्स पाइप लाइन जितना तीव्र नहीं था. 

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लिहाजा उनकी मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं बल्कि फेफड़ों तक समुचित ऑक्सीजन न पहुंच पाने यानी दम घुटने की वजह से हुई. जबकि एक मरीज की मौत एक खास दवा ना मिल पाने की वजह से हुई. जयपुर गोल्डन अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक पहले मरीज ने 23 अप्रैल की रात 10 बजकर 44 मिनट पर दम तोड़ा और 21वीं मौत 24 अप्रैल सुबह पांच बजकर 51 मिनट पर हुई. लेकिन किसी को भी ऑक्सीजन का अभाव नहीं था.

इसी अवधि में दिल्ली ऑक्सीजन की भीषण कमी से जूझ रही थी. हालांकि ये समस्या हफ्ते भर से भी ज्यादा समय तक रही. दिल्ली सरकार ही नहीं बल्कि यहां के निजी और सरकारी अस्पताल ऑक्सीजन की भीषण कमी दूर करने के लिए सरकार को लगातार त्राहिमाम संदेश भेजकर गुहार लगा रहे थे.

लोग ऑक्सीजन को बेहद परेशान रहे

जनता अपने कोविड संक्रमित मरीजों को लेकर अस्पतालों के आगे लगी एंबुलेंसेज की सैकड़ों मीटर लंबी कतार का हिस्सा बने अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. दूसरी ओर हजारों नौजवान, बूढ़े और महिलाएं एक-एक सांस के लिए तड़प रहे अपने रिश्तेदारों या दोस्तों के लिए खाली सिलेंडर लिए तपती लू के थपेड़ों के बीच खुले आसमान के नीचे ऑक्सीजन के टैंकर आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे.

एक ओर ये भयावह दृश्य और दूसरी ओर से रिपोर्ट जिसमें कहा गया कि दिल्ली में एक भी मरीज ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं मरा.

राज्यों का कहना है कि केंद्र ने हमसे मौत की वजह को लेकर कोई ब्योरा तलब ही नहीं किया. लिहाजा हमने कोविड की वजह से हुई मौत के आंकड़े ही केंद्र को दिए. वजह नहीं बताई. ये अलग बात है कि इतनी भयावह स्थिति अपनी आंखों से देखने और ऑक्सीजन की कमी से अपने लोगों को लाचारी से खोने के बाद आम नागरिक इस बयान और रिपोर्ट को पचा नहीं पा रहे कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई.

अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वो राज्यों से ब्योरा ले कि जिस दौरान अधिकतर राज्य लगातार ऑक्सीजन की कमी का शोर मचा रहे थे उस समय कितने मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई.

 

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