100 करोड़ सवारियों का आंकड़ा पार कर चुकी दिल्ली मेट्रो दिल्लीवालों की शान की सवारी है और हर मायने में दिल्ली ट्रांसपोर्ट की रीढ़ भी. मेट्रो ने दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं, लेकिन अब भी शान की ये सवारी कार वालों की रोजाना दफ्तर और काम पर जाने-आने का तरीका नहीं बदल पाई है. ये बात डीएमआरसी के इंटरनल सर्वे में सामने आई है.
सर्वे कहता है कि मेट्रो से चलने वाले ज्यादातर दिल्लीवालों में से वही लोग हैं जिनकी महीने में औसत कमाई 20 से 50 हजार रुपए महीने की है वहीं 50 हजार से 1 लाख रुपए महीने कमाने वाले दिल्लीवासियों में से सिर्फ 9.56 फीसदी लोग ही मेट्रो से सफर करते हैं.
1 लाख से ज्यादा कमाने वाले सिर्फ 1 फीसदी दिल्लीवाले चढ़ते हैं मेट्रो
डीएमआरसी के सर्वे में ये बात सामने आई है कि 1 लाख रुपए से ज्यादा कमाने वाले लोगों में सिर्फ 1.67 फीसदी ही ऐसे कम्युटर हैं जो दफ्तर या फिर काम पर आने जाने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. मतलब साफ है कि जो लोग आसानी से कार अफोर्ड कर सकते हैं वो शान की सवारी मानी जाने वाली मेट्रो से दूर ही रहते हैं. शायद यही वजह है कि दिल्ली शहर में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की संख्या 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये शहर कैसे सांस लेता है.
1 लाख से ज्यादा लोगों ने सर्वे में हिस्सा लिया
सर्वे की विश्वसनीयता इस बात से भी साफ होती है कि 1 लाख से ज्यादा लोगों ने इस सर्वे में हिस्सा लिया. आपको ये भी बता दें कि ये सर्वे पिछले साल अगस्त में कराया गया था, जाहिर है हालात अब और भी ज्यादा खराब हो चुके होंगे. वैसे इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि मेट्रो के साथ आखिरी मुकाम तक पहुंचना यानी लास्ट माइल कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या है. मेट्रो से आप खास स्टेशन तक पहुंच सकते हैं लेकिन उसके बाद का सफर परेशान करने वाला हो सकता है.