दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने अधिकारों के मामले में मुख्यमंत्री केजरीवाल की कड़ी अलोचना की. उन्होंने सीएम केजरीवाल पर सुप्री कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अनावश्यक भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया.
बीजेपी विधायक ने कहा कि कोर्ट के आदेश में बिना लाग-लपेट कहा गया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अराजकता का मार्ग त्याग दे. कोर्ट ने यह सलाह भी दी है कि सरकार सभी पक्षों के साथ सौहर्दपूर्ण तरीके से मिल-जुल कर काम करे.
विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि आप सरकार ने राजनितिक दुर्भावना से ग्रस्त होकर केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और अफसरशाही के विरुद्ध जान-बूझकर सोची समझी साजिश के तहत मोर्चा खोल दिया है.
विपक्ष के नेता ने कहा की 21 मई 2015 की अधिसूचना अभी भी कानून के रूप में यथावत बरकरार है. संविधान की धरा 239 ए के अंतर्गत उपराज्यपाल को दी गई शक्तियां अभी भी उन्ही में निहित हैं. इसी प्रकार भरष्टाचार निरोधक शाखा भी उपराज्यपाल के अधीनस्थ है.
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुच्छेद 278 के अंतर्गत इन मामलों का निपटारा नियमित बेंच के समक्ष रखा जाए. उन्होंने कहा कि भ्रम और विरोधाभाषी स्थितियां पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री को कोर्ट के समक्ष अवमानना की याचिका दायर करनी चाहिए. लेकिन वो हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, क्योंकि उनकी सच्चाई सबको पता है.