scorecardresearch
 

तस्करों के हाथों विदेश पहुंच गई थीं ऐतिहासिक प्रतिमाएं, अब ऑस्ट्रेलिया करेगा वापस

इनमें से एक प्रतिमा गौतम बुद्ध की उपदेश मुद्रा में है. ये मथुरा के पास खुदाई में मिली थी. पुरातत्वविदों के मुताबिक, ये ईसापूर्व दूसरी सदी से ईसा की तीसरी सदी के बीच की है. कुषाण काल में गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी ये कलात्मक प्रतिमा 130 सेंटीमीटर लंबी 101 सेंटीमीटर चौड़ी है. इसमें भगवान बुद्ध का आभाचक्र भी बना है. बाईं भुजा घुटनों पर है और दायां हाथ उपदेश की मुद्रा में रहा होगा जो अब टूट गया है.

Advertisement
X
मूर्तियों को राष्ट्रीय संग्रहालय में रख जाएगा
मूर्तियों को राष्ट्रीय संग्रहालय में रख जाएगा

ऑस्ट्रेलिया से तीन अनमोल धरोहरें अब भारत लौट रही हैं. पुरातात्विक महत्व की ये ऐतिहासिक प्रतिमाएं तस्करों के हाथों विदेश पहुंच गई थीं. अब भारत के दावों को मानते हुए ऑस्ट्रेलिया सरकार इन्हें लौटा रही है.

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए संस्कृति और पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा अपने साथ तीनों प्रतिमाएं लेकर लौट रहे हैं. नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया में रखी ये प्रतिमाएं भारत के विभिन्न इलाकों में खुदाई के दौरान मिली थीं. पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक, ये तीनों ईसा पूर्व दूसरी सदी से तीसरी सदी के बीच बनाई गई हैं, लेकिन तस्करों के हाथों ये अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचीं. भारत ने इन प्रतिमाओं पर अपने देश में दर्ज एफआईआर और इंडिया टुडे में छपे आलेख को आधार और सबूत मानकर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भारत का दावा मान लिया और सौहार्द के तौर पर इन्हें लौटा दिया.

Advertisement

इनमें से एक प्रतिमा गौतम बुद्ध की उपदेश मुद्रा में है. ये मथुरा के पास खुदाई में मिली थी. पुरातत्वविदों के मुताबिक, ये ईसापूर्व दूसरी सदी से ईसा की तीसरी सदी के बीच की है. कुषाण काल में गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी ये कलात्मक प्रतिमा 130 सेंटीमीटर लंबी 101 सेंटीमीटर चौड़ी है. इसमें भगवान बुद्ध का आभाचक्र भी बना है. बाईं भुजा घुटनों पर है और दायां हाथ उपदेश की मुद्रा में रहा होगा जो अब टूट गया है.

दूसरी प्रतिमाओं में तमिलनाडु से मिली देवी प्रत्यंगिरा की प्रतिमा है. चोल काल में निर्मित इस प्रतिमा का मुख सिंह का और शरीर नारी का है. ग्रेनाइट पत्थर से इस प्रतिमा का निर्माण समय 12 वीं सदी का बताया जा रहा है. ये प्रतिमा संग्रहालय से चोरी हुई और ऑस्ट्रेलिया में गिरफ्तार सुभाष कपूर नामक तस्कर की आर्ट गैलरी से जब्त की गई थी. इस प्रतिमा की 1958 1967 और 1974 में खींची गई तस्वीर तमिलनाडु के ऐतिहासिक वृद्धाचलम मंदिर में रखी थी.

तीसरी प्रतिमा बुद्ध के अनुयायियों की है. ये भी तीसरी सदी में बनाई गई है. इसकी चोरी और उसके बाद की कहानी के बारे में इंडिया टुडे ने 30 जुलाई 2001 में ही आलेख छापा था. इसमें उस जमाने के गहने कपड़ों से सुसज्जित दो पुरुष और दो महिलाएं बौद्ध स्मारक के पास पूजा कर रहे हैं. लगभग एक मीटर लंबी और 107 सेंटीमीटर चौड़ी ये प्रतिमा तमिलनाडु में बौद्ध स्तूप चंदावरम के पास 1974 में खुदाई के दौरान मिली थी. 1988 में वहां के म्यूजियम से इसे चुराया गया था. ये भी गिरफ्तार कारोबारी सुभाष कपूर के शोरूम आर्ट ऑफ द पास्ट से जब्त की गई थी.जल्दी ही ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की इन धरोहरों को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाएगा.

Advertisement
Advertisement