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1984 दंगा: सज्जन कुमार की याचिका पर सुनवाई टली

साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में दिल्‍ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार की याचिका पर 15 मई तक सुनवाई टाल दी है.

साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में दिल्‍ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार की याचिका पर 15 मई तक सुनवाई टाल दी है. दरअसल, दंगा पीड़ितों के वकली एच.एस. फुलका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि इस मामले पर फैसला टाल दिया जाए क्योंकि इससे मंगलवार को सुनाए जाने वाले पुल बंगश केस के फैसले पर असर पड़ सकता है.

सज्जन के खिलाफ निचली अदालत ने सुल्तानपुरी इलाके में हुए सिख विरोधी दंगा मामले में मुकदमा चलाये जाने के लिये आरोप तय किया था, जिसे सज्जन ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी पर आज हाईकोर्ट फैसला देने वाला था. सुलतानपुरी में हुए इन दंगों में 6 लोगों की मौत हो गई थी.

इस मामले में सज्जन के अलावा 4 और आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने हत्या, आपराधिक षडयंत्र, दंगा भड़काने और दो समुदायों में दुश्मनी फैलाने की धाराओं के तहत आरोप तय किये हैं. सज्जन के अलावा सहआरोपी वेद प्रकाश पियाल और ब्रहमानंद गुप्ता ने भी निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है. इस मामले की शिकायतकर्ता शीला कौर ने भी हाई कोर्ट में क्रॉस अपील दायर की है.

ऊधर, दिल्ली कैंट में हुए सिख विरोधी दंगा मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट 30 अप्रैल को फैसला सुनाएगा. इस मामले में भी सज्जन कुमार आरोपी हैं. यह मामला पुल बंगश स्थित गुरुद्वारे का है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान भीड़ ने पुल बंगश स्थित गुरुद्वारे पर हमला कर 3 लोगों को जिंदा जला दिया था. इस मामले में सज्जन कुमार सहित 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है. पिछली सुनाई पर डिस्ट्रिक्ट जज जे. आर. आर्यन की अदालत ने दोनों पक्षों से लिखित स्पष्टीकरण लेने के बाद फैसले के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की हुई है.

गौरतलब है कि सीबीआई ने 2005 में दर्ज दंगों के मामलों में न्यायमूर्ति जी.टी. नानावती आयोग की सिफारिशों के आधार पर 13 जनवरी को सज्जन कुमार और दूसरे आरोपियों के खिलाफ दो आरोप पत्र दाखिल किये थे. नानावती आयोग ने दंगे की घटनाओं की जांच की थी.

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