छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले का सना गांव इन दिनों सुर्ख़ियों में है. इस गांव की महिला पंच ने अपने गांव को खुले में सौच मुक्त बनाने की ठान ली. उसने अपनी कोशिशों से महज दो महीने के अंदर लगभग 100 टॉयलेट बनवाए हैं. वह भी सरकारी रकम से नहीं, बल्कि अपने खून पसीने की कमाई से. इस महिला ने टॉयलेट बनाने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए थे. हालांकि बाद में सरकारी खजाने से उन टॉयलेट की निर्माण लागत जारी की गई.
जशपुर जिले का सना गांव ODF गांव की श्रेणी में आ गया है. अब यहां का कोई भी ग्रामीण खुले में शौच के लिए नहीं जाता. ग्राम पंचायत ने खुले में शौच मुक्त ग्राम बनाने के लिए खूब पापड़ बेले, लेकिन सरकारी खानापूर्ति और रकम नहीं मिलने के चलते ग्राम पंचायत के अरमान पानी में मिल गए. फिर एक दिन सरकार के एक मंत्री ने इस गांव का रुख किया. जाते-जाते मंत्री जी ने गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने का संदेश दिया.
पंच-सरपंचों ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और सरकारी सहायता ना मिलने की कठिनाई बताई. मंत्री जी से मेल मुलाकात के दौरान गांव की महिला पंच काजल राय भी मौजूद थी. उन्होंने उसी वक्त ठान लिया कि सरकार की तरफ से पैसे मिले ना मिले, वह खुद इसके लिए रकम जुटाएंगी और अपने गांव को ODF बनाएंगी. काजल रॉय ने जो ठाना, वह दो माह में कर भी दिखाया. उसने दो चरणों में 50-50 शौचालय बनवाए.
अब सना गांव की फिजा बदल चुकी थी. महिला हो या पुरुष, बच्चे हो या बुजुर्ग कोई भी खुले में शौच के लिए नहीं निकलता. हालांकि इसके लिए काजल को खासी मशक्कत करनी पड़ी. पहले तो उन्होंने घर के अंदर ही शौच बनाने के लिए लोगों को समझाया. काजल ने इसकी उपयोगिता बताई तो एक के बाद एक गांव के सभी घरों में टॉयलेट निर्माण के लिए राजी हो गए.
हालांकि इसके बाद भी काजल की परेशानियां खत्म नहीं हुई. उन्हें शौचालय के लिए निर्माण सामग्री के लिए पैसों के इंतजाम में खासा पापड़ बेलना पड़ा. दुकानदारों ने कुछ दिनों बाद उधार देना बंद कर दिया. इसके चलते निर्माण कार्य की गति धीमी पड़ गई. काजल ने इसकी रफ्तार कायम रखने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए. इससे मिली रकम को उसने मजदूरी भुगतान और निर्माण सामग्री बनाने में उपयोग की.
करीब 800 की जनसंख्या वाले सना गांव में अब ऐसा कोई भी घर बाकी नहीं है, जहां टॉयलेट ना हो. गांव का हर एक व्यक्ति अब राहत की सांस ले रहा है. गांव वाले अबकाजल की तारीफ में कशीदे गढ़ रहे हैं. वहीं काजल अब प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान का ख़ास हिस्सा बन चुकी हैं. सरकारी अफसरों से लेकर तमाम पंचायतों में उसके इस मिशन की चर्चा हो रही है. काजल की इन कोशिशों को देखते हुए आस-पास के गांव में भी शौचालय निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने बीड़ा उठा लिया है.