दशरथ मांझी को माउंटेन मैन का खिताब हासिल है, पर बस्तर के एक विधायक भी अब माउंटेन मैन बन गए हैं. विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों की तकलीफों को देखते हुए चौथी बार पहाड़ का सीना चीर रास्ता बना दिया. चित्रकोट के विधायक दीपक बैज ग्रामीणों की मदद से बारुपाटा से छिंदबहार तक तीन किमी सड़क बना रहे हैं.
तीन दिन से विधायक दीपक बैज करीब 500 ग्रामीणों के साथ मिलकर यहां लुकु पखना पहाड़ी को तोड़कर रास्ता बना रहे है. उनके साथ इस काम में गांव के 18 साल के युवा से लेकर 70 साल की वृद्धा तक श्रमदान कर रही हैं. गांव में किसी त्यौहार-सा माहौल दिखाई दे रहा है.
लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के बारुटपाटा से ब्लॉक मुख्यालय तक आने ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी. ग्रामीण कई बार प्रशासन से सड़क की मांग कर चुके थे, पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. विधायक बैज ने कुछ दिनों पहले बिंता इलाके में ऐसी ही ग्रामीणों की मदद से सड़क बनाई. इस बात का पता चलते ही ग्रामीणों ने भी सरकार और प्रशासन की बजाय खुद ही सड़क बनाने की ठानी. जैसे ही विधायक बैज को इस बात का पता चला, वे ग्रामीणों का नेतृत्व करने पहुंच गए. अब स्थिति यह है कि तीन दिन में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया है और जल्द ही यह सड़क बनने को तैयार है.
सालों पहले बी.आर चोपडा की फिल्म नया दौर आई थी, जिसमे गांव के लोग मिलकर सड़क बनाते हैं, यह एक फिल्मी दृश्य था जिसे हकीकत मे तब्दील कर रहे है बस्तर के बारूपाटा के आदिवासी. सरकार से मोहभंग होने के बाद 31 जनवरी 2017 से गांव के महिला, पुरुष और बच्चे एकजुट होकर पहाड़ के बीच 3 किलोमीटर की लंबी सड़क बना रहे हैं, जिसमे लगभग डेढ़ किलोमीटर सडक के समतलीकरण का काम हो चुका है. इस काम मे मासूम को पीठ मे लादे दिख रही एक मां और बजुर्गो के अलावा दिव्यांग भी लगे हैं. इलाके के जनप्रतिनिधि भी सहयोग कर रहे है.
इस सड़क के बनने से 10 से 12 पंचायतों के लोगों के लिए 12 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी. सुबह होते ही जहां चाह वहां राह का जज्बा लेकर निकल पड़ते हैं गांव के लोग पहाड़ को चुनौती देने. साथ होते है सड़क बनाने के काम मे लगने वाले औजार और सहकारिता की भावना. बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़ कर हटाने और सडक को समतल बनाने के बीच उनके माथे पर पसीने की मेहनतकश बूंदें साफ नजर आती हैं. लोहण्डीगुडा और तोकापाल ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने के लिए इन्हे 20 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता था, जो इस सड़क के बनने से 12 किलोमीटर कम हो जाएगा.