नक्सली हमले के हफ्ते भर बाद आखिरकार गृहमंत्री छत्तीसगढ़ पहुंच ही गए. हमले में मारे गए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के परिजनों को ढाढस बंधाया और तमाम सीनियर आला अधिकारियों के साथ मौजूदा हालात पर चर्चा की.
नक्सली हमले के हफ्तेभर बाद जख्मों पर मरहम लगाने पहुंचे गृह मंत्री. छत्तीसगढ़ में कदम रखते ही सीधा पहुंचे हमले में मारे गए प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के घर. पिता-पुत्र दोनों को श्रद्धांजली दी और फिर पूरे परिवार का हाल जाना और उन्हें ढाढस बंधाने की कोशिश की. करीब 25 मिनट की इस मुलाकात में उन्होंने ये भी वादा किया कि पटेल और उनके बेटे के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा.
गृह मंत्री आए, बड़े दावे और वादे भी साथ लाए. लेकिन सवाल तो देरी पर उठ ही रहे हैं. जिस वक्त देश में बड़ा नक्सली हमला हो रहा था उस वक्त शिंदे विदेश में थे. मातमपुर्सी की फुर्सत भी मिली तो पूरे एक हफ्ते बाद. हांलाकि जब पहुंचे तो सफाई से लैस होकर.
पहली बार नेताओं पर नक्सलियों ने इतना बड़ा हमला किया है. सियासी खेमे में हड़कंप मचा है. बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि नेताओं के रूट बदले क्यों गए थे. साजिश के शक को गृहमंत्री भी खारिज नहीं कर रहे. जांच सुरक्षा में हुई चूक की भी हो रही है. नक्सल समस्या से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गृहमंत्री ने 5 जून को तमाम मुख्यमंत्रियों की मीटिंग भी बुलायी है.